कन्नौज। सर्दी बढ़ने से पशुओं में निमोनिया का खतरा बढ़ गया है। पशुओं के गले में तकलीफ के साथ सांस लेने में दिक्कत के मामले बढ़ गए हैं। इसके चलते पशुओं की मौत हो रही है। रोजाना बड़ी संख्या में पशुपालक बीमार पशुओं को लेकर पशु चिकित्सालय पहुंच रहे हैं।
जिले में 665471 पशु हैं। इनमें 234517 गोवंश और 430954 भैंस हैं। करीब दो लाख से अधिक परिवार पशुपालन व्यवसाय से जुड़े हैं। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. संजय शाल्या ने बताया कि सर्दी के दिनों में पशुपालक गाय-भैंस व दूसरे जानवरों को बचाने के लिए पशुशाला में घासफूस और पुआल फैला देते हैं। यह उपाय ठीक है। पशुपालकों के बहुत समय तक घासफूस व पुआल न बदलने से दिक्कत होती है। पुआल और घासफूस के गीले और गंदा होने से निमोनिया का खतरा रहता है। पशुओं में किलनी और पेट मेें कीड़े की बीमारी भी हो जाती है। जानकारों के मुताबिक इन दिनों पशु चिकित्सालयों में रोज 12 से 13 पशु इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए ये करें उपाय
शाम से सुबह तक मवेशियों को झूल ओढ़ाएं।
अजवाइन, जीरा और नमक को गुण में पकाकर सुबह-शाम पिलाएं।
सरसों की खली और चने की चुनी खिलाएं।
जगह बदल कर पशुओं को बांधें। इससे जगह सूखती रहे।
सर्दी में पशुओं के पास से मल और मूत्र को हटाकर हल्की राख डालते रहें।
नाक से झाग और तेजी से सांस लेने के लक्षण मिलने पर पशु चिकित्सक से सलाह लें।
बासी चारा न खिलाएं।