हसेरन (कन्नौज)। इत्रनगरी के निकलकर फतेहपुर जिले तक जाने वाली पांडु नदी को अब संजीवनी मिलेगी। इसके उद्गम स्थल से कायाकल्प किया जाएगा। जनपद की सीमा में 31 किलोमीटर तक खोदाई का काम शुरू होगा। साथ ही नदी के किनारे सड़क का भी कायाकल्प किया जाएगा। ताकि यातायात सुगम हो जाएगा। शासन के नदी उत्थान कार्यक्रम के अंतर्गत शुक्रवार को विधायक व डीएम ने फावड़ा चलाकर श्रमदान किया और पांडु नदी के जीर्णोद्धार की संकल्पना को साकार किया।
क्षेत्र के ग्राम रौंसा में विधायक तिर्वा कैलाश सिंह राजपूत, जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री व मुख्य विकास अधिकारी रामकृपाल चौधरी ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पांडु नदी के उद्गम स्थल पर भूमि पूजन किया। यहां सामूहिक यज्ञ का भी आयोजन किया गया। इसमें नहर विभाग के अधिशासी अभियंता सूर्यमणि सिंह, खंड विकास अधिकारी रतिराम, प्रधान दीपक कुमार, सर्वेश शाक्य, विवेक दुबे ने भी लोक कल्याण के लिए आहुतियां दी।
विधायक व डीएम ने फावड़ा चलाकर पांडु नदी के कायाकल्प की शुरुआत की। सीडीओ ने बताया कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप मनरेगा व राज्य वित्त की धनराशि से जनपद में 31 किलोमीटर नदी का जीर्णाेद्धार कराया जाएगा। विधायक ने नहर पुल से जनपद की सीमा तक खस्ताहाल सड़क को डामरीकृत कराए जाने की घोषणा की। ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि पुष्पेंद्र शाक्य ने सभी का स्वागत किया। इस मौके पर डीडीओ नरेंद्र देव द्विवेदी, भाजपा मंडल अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह शाक्य, जितेंद्र सिंह राजावत, नीरज राजपूत, अर्जुन मौजूद रहे।
औद्योगिक कचरा गिरने से प्रदूषित हो गई पांडु नदी
पांडु नदी का उद्गम स्थल हसेरन ब्लॉक के रौंसा गांव में है, जो सकतपुर के पास है। यह नदी यहां से निकलकर कानपुर देहात, कानपुर नगर से होकर फतेहपुर जिले में गंगा नदी में जाकर मिल जाती है। इसकी बालू पीली होने के कारण इसका नाम पांडु नदी पड़ गया। जिले में यह नाले के रूप में तब्दील हो गई है। शासन ने इसके जीर्णोद्धार की रूपरेखा तैयार कर कायाकल्प के लिए बजट आवंटित किया है। कानपुर देहात व कानपुर नगर में इसमें औद्योगिक कचरा डाला जा रहा है, जिससे यह प्रदूषित हो गई है। कानपुर का प्रसिद्ध शोभन सरकार आश्रम व बाघपुर का योगेश्वर धाम आश्रम भी पांडु नदी के किनारे हैं।