उत्तर प्रदेश के सबसे युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्वाचन क्षेत्र कन्नौज जनपद में ब्लाक प्रमुख के चुनाव में भी युवाओं का बोलबाला रहा है। नीलू यादव सबसे युवा, जबकि बृजकिशोर सिंह यादव सबसे बुजुर्ग ब्लाक प्रमुख बने हैं। क्षेत्र पंचायत के सदन में तीन महिला व पांच पुरुष ब्लाक प्रमुख कुर्सी पर बैठेंगे। इनमें से पांच परास्नातक और एक स्नातक डिग्रीधारी, जबकि एक इंटर पास व एक साक्षर है। इनमें से क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी) के चुनाव के दौरान दो लोग संध्या यादव और नीलू यादव निर्विरोध बीडीसी चुने गए थे, जबकि अन्य छह लोग चुनाव लड़कर जीते थे।
कलेक्ट्रेट स्थित चुनाव कार्यालय में दर्ज आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2016 में हुए पंचायत चुनाव में कन्नौज के सबसे युवा ब्लाक प्रमुख बनने का गौरव 31 वर्षीय वीरपाल यादव उर्फ नीलू को मिला है। नीलू यादव सदर ब्लाक के वार्ड 58 तहसीपुर बरौली से निर्विरोध बीडीसी चुने गए थे। वह पीएसएम कालेज से परास्नातक तक पढ़े हैं।
वहीं, सबसे अधिक 56 वर्ष आयु छिबरामऊ के ब्लाक प्रमुख बृजकिशोर सिंह की है। वह भी परास्नातक पास हैं। बृजकिशोर ने वार्ड 73 असालताबाद प्रथम से बीडीसी का चुनाव लड़ा था और 153 वोटों से जीत दर्ज की थी।
33 वर्षीया तालग्राम की ब्लाक प्रमुख संध्या यादव ने बीडीसी का भी चुनाव वार्ड 45 बिराहिमपुर निजामपुर से निर्विरोध जीता था। वह भी परास्नातक हैं।
35 वर्षीया गुगरापुर की ब्लाक प्रमुख रूपा दोहरे भी परास्नातक हैं। वह गुगरापुर के वार्ड 13 राजूपुर चांदापुर से बीडीसी का चुनाव लड़ी थीं और 21 वोटों से जीत दर्ज की थी। जलालाबाद के 35 वर्षीय ब्लाक प्रमुख चंद्रशेखर यादव इंटर तक पढ़े हैं।
बीडीसी के चुनाव में उन्होंने वार्ड 14 तिलपई डिगसरा से चुनाव लड़कर चचेरे भाई कृष्णकांत को 89 मतों से हराया था। 37 वर्षीय उमर्दा के ब्लाक प्रमुख इंद्रेश यादव ने परास्नातक तक शिक्षा प्राप्त की है। वह उमर्दा के वार्ड 92 कुढ़िना तृतीय से बीडीसी का चुनाव लड़े और 88 वोटों से जीते थे।
39 वर्षीय हसेरन के ब्लाक प्रमुख उमा शंकर बेरिया वार्ड चार पूराराय से चुनाव लड़े थे। तब उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी कमलेश को 34 वोटों से हराया था। वह बीडीसी के चुनाव के दौरान निरक्षर थे, लेकिन अब साक्षर हो चुके हैं।
सौरिख की 50 वर्षीया ब्लाक प्रमुख नीलम यादव परास्नातक डिग्री धारी हैं। वह वार्ड 44 वीरपुर से बीडीसी का चुनाव लड़ीं और अपनी प्रतिद्वंदी रामबाबू को 237 वोटों से हराकर बीडीसी बनी थीं।