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करंट ने ली अपनों की जान, अब मुआवजे के लिए परेशान

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कन्नौज। जिले में जनवरी से चालू महीने तक ढीले तारों के करंट से 11 लोगों और 38 मवेशियों की की मौत हो चुकी है। ये हादसे बिजली विभाग की लापरवाही से हुए। हादसों के बाद हंगामा होने पर मौके पर अधिकारियों ने मुआवजे का आश्वासन तो दिया लेकिन ज्यादातर को मुआवजा नहीं मिल पाया है। पीड़ित और मृतकों के आश्रित अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं।
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केस 1-
ढाई माह से भटक रहे परिजन
ग्यारह जुलाई को डालूपुर गांव निवासी राजेश्वर सिंह (80) मूंगफली की फसल देखने खेत पर गए थे। खेत पर टूटे पड़े बिजली के तार की चपेट में आने से उनकी मौके मौत हो थी। ग्रामीणों को राजेश्वर तारों में चिपके मिले थे। हंगामा होने पर पुलिस मौके पर पहुंची तो कार्रवाई करने का बात हुई। अब ढाई महीने से परिजन मुआवजे के लिए भटक रहे हैं।
केस 2-
सीधे मुंह बात नहीं कर रहे अफसर
उन्नीस जुलाई को गांव भुलरिया में खेत पर जा रहे किसान महेंद्र (40) पर एचटी लाइन का तार टूट कर गिर गया। करंट से किसान की मौत हो गई थी। ग्रामीणों के हंगामा करने पर बिजली विभाग ने मुआवजा देने का अश्वासन दिया था। परिवार के लोगों का कहना है कि अब अधिकारी सीधे मुंह बात नहीं कर रहे हैं।
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केस 3-
आश्वासन मिला लेकिन अब सुनवाई नहीं
20 जुलाई को गुरसहायगंज के 55 वर्षीय रियाजुद्दीन मकान की छत पर गए थे। छत के करीब से निकले हाईटेंशन लाइन के करंट की चपेट में आकर उनकी मौत हो गई। हंगामा होने पर विभाग के अधिकारियों ने आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया। परिजनों ने बताया कि अभी तक मुआवजा नहीं मिला है।
केस 4-
ढीले तार के करंट से गई थी जान
नौ सितंबर को किर्राना गांव निवासी पशु पालक यशपाल (44) खेत में फसल चर रहे अन्ना मवेशियों को भगाने गए थे। इसी दौरान एचटी लाइन के ढीले तारों की चपेट में आने से मौत हो गई थी। अभी तक परिवार को मुआवजा नहीं मिला है।
इस तरह मिलता मुआवजा
बिजली के करंट से नुकसान होने या किसी की मौत होने पर लेखपाल से जांच कराई जाती है। लिखापढ़ी के बाद पीड़ित किसी उच्च अधिकारी को शिकायती पत्र देता है। उसी शिकायती पत्र में लेखपाल या कानूनगो की जांच रिपोर्ट को लगा कर बिजली विभाग को भेजा जाता है। इसके बाद बिजली अधिकारी कागज विद्युत सुरक्षा कार्यालय भेजते हैं। वहां के उपखंड अधिकारी की जांच के बाद मृतक के आश्रितों को मुआवजा मिलता है।
जिले में नहीं है विद्युत सुरक्षा कार्यालय
जिले में विद्युत सुरक्षा कार्यालय नहीं है। यहां का कार्यालय फर्रुखाबाद से संचालित हो रहा है। हालांकि अधीक्षण अभियंता का कार्यालय कन्नौज में कई वर्षो से खुला है। इसके चलते बिजली दुर्घटना के मामले में कागज भेजने के बाद जांच होने में महीनों लग जाते है। समय से जांच न होने से मुआवजा मिलने में देरी होती है।
गर्मी व ओवर लोडिंग के चलते तार ढीले होते रहते हैं। समय समय पर उन्हें टाइट कराया जाता है। खेत के निकट से निकली लाइन के ढीले होने की जानकारी नहीं मिलती है, इस कारण दुर्घटनाएं हो जाती हैं। दुर्घटना होने पर पीड़ितों को समय पर मुआवजा देने का प्रयास किया जाता है लेकिन जांच और कागजी कार्रवाई में देरी हो जाती है। जीपी यादव अधीक्षण अभियंता
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