विकास खंड तालग्राम के उमरापुर में ग्रामीणों ने चकबंदी विभाग पर पक्षपातपूर्ण आरोप लगाते हुए चकबंदी प्रक्रिया निरस्त करने की मांग की। शिकायत पर गांव पहुंचे चकबंदी अधिकारियों को ग्रामीणों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने जमकर नारेबाजी की। अधिकारी चकबंदी न चाहने वालों के हस्ताक्षर कराकर सीओ के साथ लौट हो गए।
उमरापुर के किसानों ने चकबंदी प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही विभागीय अधिकारियों पर पक्षपात का आरोप लगाया था। बताया कि चकबंदी में छोटे किसानों की कम मालियत लगाकर बड़े किसानों को आवंटित कर दी, जबकि बड़े किसानों की कम उपजाऊ जमीन की अधिक मालियत लगाकर छोटे किसानों को खराब जमीन दे दी। सड़क किनारे की छोटे किसानों की जमीन को बड़े किसानों के खातों में कर दी। मामला जीविका से जुड़ा होने के कारण दर्जनों किसानों ने तहसील दिवस में शिकायत कर चकबंदी विभाग से चकबंदी निरस्त कराकर दोबारा कराए जाने की मांग उठाई थी।
बुधवार की दोपहर चकबंदी अधिकारी सीओ शीश प्रताप, लेखपाल अभिषेक, छह लेखपालों और वकीलों के साथ गांव के प्राथमिक पाठशाला पहुंचे। किसानों की समस्या सुनने का प्रयास किया, लेकिन किसानों ने नारेबाजी शुरू कर दी। चकबंदी प्रक्रिया निरस्त कराने के लिए हंगामा करने लगे। काफी समझाबुझाकर अधिकारियों ने किसानों को शांत किया। उन्होंने चकबंदी न चाहने वाले किसानों को हस्ताक्षर करने की राय दी। विरोध करने वाले किसानों में करन सिंह, हंसराम, कौशलेंद्र, रामकिशन, प्रभु दयाल, वीरेंद्र, तिलक सिंह, रामफल, राकेश कुमार, कृष्ण कुमार, रामनाथ, रामकिशन आदि गांव के 80 फीसदी किसानों ने प्रतिक्रिया निरस्त कराने के पक्ष में हस्ताक्षर किए। चकबंदी प्रक्रिया पूरी करने के पक्ष में कोई किसान हस्ताक्षर करने नहीं आया।
किसान कौशलेंद्र ने बताया कि अगर सुनवाई न हुई तो तहसील में अनिश्चित कालीन धरना देंगे। वहीं, पक्षपात पूर्ण रवैये की शिकायत शासन से की जाएगी। सीओ शीश प्रताप ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। इसके बाद ही समाधान होगा।