जिला अस्पताल की ओपीडी में बनाया गया पर्चा।
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कन्नौज। जिला अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में पहुंचने वाले मरीजों को अस्पताल प्रशासन गुमराह कर रहा है। मरीजों के लिए बनाए जाने वाले पर्चे में औपचारिकता निभाई जाती है। इसमें दी र्गइं प्रविष्टियाें को पूरा नहीं किया जाता है। मरीज के पते का कालम भी अधूरा छोड़ दिया जाता है। महकमे के बड़े अधिकारी इससे अनजान हैं।
ओपीडी में बनाए जाने वाले पर्चों की आपूर्ति भारतीय चिकित्सा परिषद र्नई दिल्ली से होती है। एक रुपये में पर्चा बनाया जाता है। पर्चे में दी र्गइं सारी प्रविष्टियाें को भरा जाना होता है। पर्चे में मरीज का नाम, उम्र, पता, बीपी, वजन, लंबाई सहित कई बिंदुओं का उल्लेख है। पर्चा काउंटर पर नाम, तारीख भरकर मरीज को डॉक्टर के पास भेज दिया जाता है। चिकित्सक मरीज से बीमारी पूछकर दवा लिख देते हैं। इससे मरीजों को कई चीजों को जानकारी नहीं हो पाती है। वह दवाई लेकर लौट जाते हैं।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.के स्वरूप ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में मैन पॉवर की कमी है। सारी प्रविष्टियां भरने में करीब बीस से पच्चीस मिनट का समय लगेगा। तब एक चिकित्सक सुबह आठ से दो बजे तक ओपीडी में महज 30 से 35 मरीजों को ही परामर्श दे सकेगा। मौजूदा समय में एक डॉक्टर एक सैकड़ा से अधिक मरीजों को देखता है। कई ऐसे देश हैं, जहां एक दिन में सिर्फ बारह मरीज देखने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि कुछ प्रविष्टियां ऐसी हैं, जिन्हें आसानी से भरा जा सकता है। अगर वह भी नहीं भरी जा रहीं तो गंभीर मामला है। कड़ाई की जाएगी।