आदर्श शिक्षक का आंकलन सिर्फ छात्र कर सकता है। बस छात्र की नजर में टीचर ठीक होना चाहिए। अगर टीचर और छात्र के बीच में सामंजस्य बैठ जाए तो इसके परिणाम दूरगामी होते हैं। क्योंकि छात्रों के ऊपर ही समाज और देश का भविष्य टिका होता है। कुछ ऐसा मानना है राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयनित सुभाष इंटर कालेज नेरा के प्रधानाचार्य मोहम्मद अहमद खां का।
बजरिया शेखाना निवासी प्रधानाचार्य मोहम्मद अहमद खां को आगामी पांच सितंबर को विज्ञान भवन नई दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। पुरस्कार के तौर पर उन्हें 50 हजार रुपये की नगद धनराशि और राष्ट्रपति के हाथों प्रमाण पत्र दिया जाएगा। मंगलवार को जब प्रधानाचार्य मोहम्मद अहमद खां को जब यह जानकारी मिली तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने कहा कि आज ऐसा महसूस हो रहा कि मेरे जीवन भर की मेहनत साकार हो गई। उनकी इस कामयाबी को लेकर परिवारीजनों में बेहद खुशी है।
मूल रूप से हरदोई जनपद की तहसील बिलग्राम के ग्राम हरपुरा निवासी मो. अहमद खां पुत्र स्व. हाजी मो. अली खां किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। कानपुर से एमए अर्थशास्त्र और बीएड करने के बाद सुभाष इंटर कालेज नेरा में 21 अक्तूबर 1975 को उनकी बतौर सहायक टीचर नियुक्ति हुई। इसके बाद वह लगातार सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी करते रहे। वर्ष 1991 में कोतवाली के पास तालीमी कारवां का आयोजन कराया।
इसमें कई विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों ने शिरकत की। उन्होंने बताया कि खेलकूद प्रतियोगिताओं में उनका विशेष जुड़ाव रहा है। कालेज के तमाम छात्रों को उन्होंने नेशनल तक की प्रतियोगिताओं में हिस्सेदारी कराई है। जुलाई 2010 में उनका इसी विद्यालय में प्रधानाचार्य के पद पर प्रमोशन हुआ। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के गरीब बच्चों का वह स्कूल में मुफ्त में दाखिला कराते हैं। ताकि सभी को समान शिक्षा का हक मिल सके। उन्होंने कहा कि तमाम बड़े-बजुर्गों की दुआओं का नतीजा है, कि वह इस मुकाम को हासिल करने में कामयाब रहे हैं।