10 साल पहले खड़नी में ग्राम प्रधान बने एक किन्नर ने
गांव की महिलाओं के लिए सुलभ शौचालय का निर्माण कराया था। निर्माण के बाद
से इस पर दबंगों ने कब्जा कर लिया। आज हालत यह है कि उसमें कंडे और
उपले भरे हैं और अंदर जानवर बांधे जाते हैं, जबकि गांव की महिलाएं खेतों पर
शौच जाने को मजबूर हैं।
सरकार भले ही अब गांव गांव शौचालयों पर जोर दे रही
हो, पर इस शोच के साथ 10 पहले ही एक किन्नर प्रधान ने गांव में सामुदायिक
शौचालय का निर्माण कराया। गांव में बने एकमात्र सामुदायिक शौचालय से लोगों
को लगा था कि अब महिलाओं को खेतों पर नहीं जाना होगा, पर यह शौचालय शुरू
नहीं हो सका। निर्माण के बाद से ही इस पर कब्जा हो गया।
इसमें जानवर
बांधे जाने लगे और कंडे व उपलों को भर दिया गया। ऐसी हालत में गांव की
महिलाओं को अभी भी खेतों पर जाना पड़ रहा है। छोटे भदौरिया, बबलू तोमर,
राजा कुशवाह, भोलू गुप्ता, आलोक सिंह, गोविंद गुप्ता, धर्मेंद्र चौरसिया,
अनूप कुशवाह, संगम दुबे, धीरेंद्र भदौरिया, राहुल प्रताप आदि ने प्रशासन से
सामुदायिक शौचालय से कब्जा हटवाकर महिलाओं के प्रयोग के लिए खोलने की मांग
की है।