ग्राम अटिया निवासी सीआरपीएफ का जवान हरवंश सिंह
कुशवाह करीब डेढ़ वर्ष पहले अगस्त माह में नक्सली हमले में देश के लिए अपनी
जान गवां बैठे थे। उस समय शासन-प्रशासन के लोगों ने उसके परिजनों को
सुविधाओं के नाम पर तमाम आश्वासन दिए थे, पर डेढ़ वर्ष बीतने के बाद भी अभी
तक पूरे नहीं हो सके हैं।
हालत यह है कि शहीद का स्मारक तक अभी अधूरा पड़ा
है। ग्राम अटिया निवासी राजाराम कुशवाह का बेटा हरवंश सिंह कुशवाह
सीआरपीएफ में तैनात थे। वर्ष 14 में वह छत्तीसगढ़ में नक्सली हमले के दौरान
अपनी जान गंवा बैठे थे। देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले जवान
का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ पैतृक गांव अटिया स्थित उसके खेत
में किया गया था।
उस समय जुटे शासन-प्रशासन के लोगों ने सैनिक के परिवार को
तमाम तरह के आश्वासन दिए थे। शहीद की पत्नी नीता देवी ने बताया कि उस समय
उन लोगों ने पेट्रोल पंप और पति का स्मारक बनवाने के साथ मकान के ऊपर से
निकली बिजली की लाइन हटवाने और राइफल का लाइसेंस बनवाने की मांग की थी।
अभी
तक सिर्फ हैंडपंप लगवाया गया और मकान के ऊपर से बिजली की लाइन हटवाई जा
सकी है। शस्त्र लाइसेंस को अधिकारी उसे यह कहकर टरका देते हैं, तुम्हें
अब शस्त्र की क्या जरूरत, बच्चे छोटे हैं। सैनिक के वृद्ध पिता राजाराम ने
बताया कि पुत्र की मौत के बाद अफसरों ने उसे चार एकड़ जमीन देने का वादा
किया था, पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
वह कई बार विभाग के चक्कर काट
चुके हैं। लेखपाल ने यह कहकर कि मौजा में बचत की कोई जमीन नहीं है। ऐसे में
उसे कहां से आवंटित किया जाए। सैनिक के चार बच्चे हैं सबसे बड़ी पुत्री
संध्या (16), करुणाकर (14), शरणागत (13) व आशुतोष (11) इंटर कालेज में
पढ़ाई कर रहे हैं। हादसे के बाद 20 अगस्त को प्रदेश के सीएम अखिलेश यादव
सैनिक के गांव पहुंचे थे, तब उन्होंने उसकी पत्नी और पिता को 20 लाख रुपये
की चेक प्रदान कर आर्थिक मदद की थी।