तिर्वा(कन्नौज)। राजकीय मेडिकल कालेज में करीब दो साल से रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं है। इससे अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे। एमआरआई, सीटी स्कैन की रिपोर्ट भी नहीं मिल रही। इससे मरीजों को परेशानी हो रही है।
राजकीय मेडिकल कालेज में कोविड से पहले की ओपीडी में एक से दो हजार के लगभग हर रोज मरीज आते थे। कोविड कॉल के दौरान खुली ओपीडी में भी सैकड़ों की तादाद में मरीज इलाज की आस में मेडिकल कालेज जा रहे हैं। यहां मरीजों की जांच की व्यवस्था कराई गई थी। कालेज में एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन(कंप्यूटराइज्ड टोमोग्राफी), एमआरआई(मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग) समेत सभी जांचें होती थीं। यह सब कुछ सरकारी कीमत में होता था। करीब दो साल से कालेज के अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला बंद है। मरीजों का अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहा। इससे यहां आने वाली गर्भवती महिलाओं को परेशानी हो रही है। कालेज में अल्ट्रासाउंड न होने से मरीजों को निजी पैथोलॉजी पर खासे रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। मरीजों को एमआरआई व सीटी स्कैन की रिपोर्ट नहीं मिल पा रही। ऐसे में इन्हें बाहर अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। निजी संचालक मनमानी वसूली करते हैं।
वहीं प्राचार्य डॉ.नवनीत कुमार ने बताया कि कालेज में रेडियोलॉजिस्ट न होने से दिक्कत है। कई बार शासन को प्रस्ताव भेजकर रेडियोलॉजिस्ट की मांग की गई है। रेडियोलॉजिस्ट आने के बाद समस्या दूर हो जाएगी।
ये है स्थिति
- मेडिकल कालेज में अल्ट्रासाउंड 100 से 120 रुपये में हो जाता था।
- निजी संचालक अल्ट्रासाउंड के लिए 600 से 1200 रुपये तक वसूलते हैं।
- तिर्वा में एमआरआई और सीटी स्कैन की व्यवस्था नहीं है। इसके लिए कन्नौज शहर या दूसरे जिले में जाना पड़ता है।
कई जिलों से आते हैं मरीज
राजकीय मेडिकल कालेज में जिले के अलावा, फर्रुखाबाद, औरैया, कानपुर देहात और जालौन के भी मरीज पहुंचते हैं। सुविधाएं न मिलने से इन्हें मायूस होकर लौटना पड़ता है। इनका धन और समय दोनों बर्बाद होते हैं।