क्षेत्र के गांव सियरमऊ में निर्माणाधीन नेडा का
प्रशिक्षण केंद्र कछुआ गति से बन रहा है। यही वजह है कि निर्धारित समय सीमा
मार्च 2016 तक भवन बनकर तैयार होने के आसार नहीं हैं। फिलहाल सुगंध एवं
सुरस विकास केंद्र के सभागार व भवनों में ट्रेनिंग देकर वैकल्पिक व्यवस्था
के तहत काम चलाया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा
विकास अभिकरण की ओर से एक नवंबर 14 में कन्नौज में नेडा का प्रशिक्षण
केंद्र बनाने को मंजूरी दी गई थी। इसकी लागत 17 करोड़ 87 लाख 80 हजार रुपये
निर्धारित की गई है। ट्रेनिंग सेंटर निर्माण के लिए जलालाबाद ब्लाक के
गांव सियरमऊ में सरकारी भूमि चयनित हुई थी।
ग्रामीणों ने बताया कि शुरू में
तो काम तेजी से हुआ, पर फिर सुस्ती बरती जाने लगी। चुनाव में व्यस्त अफसर
मानीटरिंग नहीं कर पा रहे हैं, इसलिए ठेकेदार व कार्यदायी संस्था सुस्त पड़
गई हैं। इससे कार्य पूर्ण होने की समय सीमा व लागत बढ़ने का खतरा मंडराने
लगा है।
कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम की ओर से डीएम समेत अन्य
अफसरों को दी गई बीते नवंबर माह तक की प्रगति रिपोर्ट के आंकड़ाें के
अनुसार, अभी तक नौ करोड़ 55 लाख रुपये का बजट उपलब्ध हो चुका है। इसमें
से पांच करोड़ 72 लाख 61 हजार रुपये ही व्यय करके काम कराया जा सका है।
करीब एक साल के दौरान 48 फीसदी प्रगति पहुंच सकी है। ऐसी स्थिति में मार्च
तक काम पूरा होने के आसार ठंडे पड़ते नजर आ रहे हैं। प्रशासनिक भवन, हास्टल
का कार्य निर्माणाधीन है। इस बाबत राजकीय निर्माण निगम के इकाई प्रभारी
राम मोहन अग्निहोत्री से संपर्क का प्रयास किया गया पर उनका फोन ही नहीं
उठा।
उधर, नेडा के परियोजना अधिकारी एसके गुप्ता कहते हैं कि शासन स्तर से
मानीटरिंग चल रही है। राजकीय निर्माण निगम के अफसरों से कहा गया है कि वे
मार्च तक प्रशासनिक भवन व हास्टल हर हाल में बनवा दें, ताकि वहां प्रशिक्षण
शुरू कराया जा सके। कहा कि मौजूदा समय में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत
एफएफडीसी में प्रशिक्षण शुरू करा दिया गया है।
हले बैच में 30 से अधिक
बेरोजगारों को सौर ऊर्जा कंपनी की तरफ से प्रशिक्षण दिया भी जा चुका है। बताया
कि इसी महीने दूसरे बैच का प्रशिक्षण भी शुरू हो जाएगा। प्रशिक्षण संपन्न
कराने को नेडा को प्रति बैच दो लाख रुपये के हिसाब से एफएफडीसी को भुगतान
करना पड़ रहा है।
नेडा के परियोजना अधिकारी बताते हैं कि बेरोजगार युवकों
को प्रशिक्षण से इस लायक बनाया जा रहा कि वे रोजगार का अवसर पा सकें।
प्रशिक्षण छह दिवसीय होता है। इसमें आईटीआई से किसी भी ट्रेड में डिप्लोमा
होल्डर या पालीटेक्निक कर चुके बेरोजगार युवक-युवतियों का चयन होता है।
प्रशिक्षण के दौरान सोलर लाइट के क्षेत्र में सक्रिय नामीगिरामी
कंपनियों के विशेषज्ञ आकर ट्रेनिंग देते हैं। इसके बाद प्रशिक्षणार्थियों
में से कई को संबंधित कंपनी से जुड़ने का मौका मिल जाता है। बताया कि
बेरोजगार युवकों को कंपनी की ओर से जिले में लगाई गईं सोलर लाइटों के
रखरखाव का काम दिया जाता है।