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Kannauj News: काली नदी के जहरीले पानी को शुद्ध करेंगे प्राकृतिक फिल्टर चैंबर

Sun, 19 Apr 2026 01:03 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
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कन्नौज। गंगा की तरह अब काली नदी पर भी प्राकृतिक फिल्टर चैंबर बनाकर नदी को स्वच्छ बनाया जाएगा। इसके लिए छिबरामऊ, समधन, सिकंदरपुर में स्थलों का चयन किया जाएगा। कई फैक्ट्रियों का जहरीला कचरा सीधे नदी में डाले जाने से इसका पानी जहरीला हो चुका है, यह पानी मवेशियों के लायक भी नहीं रह गया है। यहां तक कि फसलों में सिंचाई के लिए भी यह पानी उपयुक्त नहीं है।
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काली नदी मुजफ्फरनगर जिले में खतौली के पास अंतवाड़ा गांव के पास एक नाले से शुरू होकर प्रदेश के कई जिलों से गुजरती है। खासकर मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अलीगढ़, कासगंज, एटा, फर्रुखाबाद से होकर बहती है। कन्नौज में यह गंगा नदी में मिल जाती है, इससे गंगा नदी भी इसके प्रभाव से अधिक प्रदूषित हो रही है। यह नदी लगभग 550 से 600 किलोमीटर के दायरे में फैली है। जिले के 100 से अधिक छोटे-बड़े गांव इससे सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं। गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने की मुहिम को अमली जामा पहनाने के लिए काली नदी को जनपद में स्वच्छ बनाने की कवायद शुरू कर दी गई है। इसके लिए छिबरामऊ, समधन, सिकंदरपुर में स्थलों का चयन किया जाएगा। यहां पर गंगा नदी की तर्ज पर प्राकृतिक फिल्टर चैंबर बनाए जाने की योजना है। इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। धनराशि मिलते ही चैंबर निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।


कई फैक्टरियों का अनुपचारित कचरा सीधे नदी में डाला जा रहा

काली नदी में किसी एक रिफाइनरी नहीं, बल्कि मुजफ्फरनगर, मेरठ, हापुड़ और बुलंदशहर के औद्योगिक क्षेत्रों की चीनी मिलों, कागज मिलों, टेक्सटाइल, डिस्टिलरीज (शराब कारखाने) और बूचड़खानों का अनुपचारित जहरीला कचरा सीधे नदी में डाल दिया जाता है, जिससे इसका प्रदूषण स्तर दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। खतौली की चीनी मिल और मेरठ क्षेत्र के औद्योगिक कारखाने मुख्य रूप से इस नदी को प्रदूषित कर रहे हैं।
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गंभीर बीमारियों का कारण बन रही काली नदी
काली नदी अब एक नाले के रूप में बदल चुकी है। क्षेत्र के 100 से अधिक गांव इससे प्रभावित हैं। इस नदी का प्रदूषण कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन रहा है। वहीं मवेशी भी दुर्गंधयुक्त पानी इस्तेमाल नहीं कर पाते। कटरी इलाके ग्रामीणों की मानें तो जो मवेशी गर्मी होने पर काली नदी में घुस जाते हैं, वह त्वचा रोग या गंभीर बीमारियों के शिकार हो जाते हैं।
गंगा से मिलता है संगम
कन्नौज के जलालपुर अमरा गांव के पास काली नदी गंगा में मिलती है, वहां का दृश्य बेहद चिंताजनक है। साफ तौर पर देखा जा सकता है कि गंदे नालों का मटमैला पानी काली नदी में मिल रहा है और वहीं से यह गंदगी गंगा नदी में भी जा रही है। यह न सिर्फ पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि गंगा की निर्मलता पर भी सवाल उठाता है।


कभी था सात नदियों का संगम
इत्र नगरी में एक समय गंगा, रामगंगा, ईशन, काली, पांडु, अरविंद और चित्रा समेत सात नदियों का संगम होता था। अब केवल गंगा और काली नदी ही अस्तित्व में बची हैं, जिनका उचित रखरखाव किया जाना इनके अस्तित्व को बचाए रखने के लिए जरूरी हो गया है।


काली नदी के पानी को शुद्ध करने के लिए एक एरियल सर्वे कराया गया था, जिसमें 21 बड़े नालों को चिह्नित किया गया था। इन पर प्राकृतिक फिल्टर चैंबर बनाने के निर्देश डीपीआरओ को दिए गए हैं। एक चैंबर पर करीब दो लाख रुपये खर्च होंगे, जिसके लिए शासन से बजट मांगा गया है।
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-आशुतोष मोहन अग्निहोत्री, जिलाधिकारी
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