मंडी स्थित गेहूं खरीद केंद्र पर पसरा सन्नाटा।
- फोटो : Amar ujala
प्रदेश सरकार के रुख के बाद अफसर गेहूं खरीद पर विशेष जोर देने का दावा कर रहे हैं। लेकिन हकीकत इसके इतर है। पिछले 14 दिन में सरकारी गेहूं खरीद केंद्र पर एक भी दाना नहीं खरीदा गया। जबकि किसानों के लिए खाते में 25 लाख रुपये शासन ने भेज दिए गए हैं। इस बार गेहूं खरीद का लक्ष्य 50 हजार क्विंटल निर्धारित किया गया है।
शुक्रवार को निगम मंडी स्थित विपणन शाखा के सरकारी गेहूं खरीद केंद्र पर सन्नाटा छाया था। केवल बैनर टंगा हुआ था और चैनल पर ताला लटका था। खरीद केंद्र प्रभारी एसएमआई अजय कटियार पीडीएस गोदाम पर मौजूद थे। उन्होंने बताया कि इस बार उन्हें खरीद केंद्र पर मानक के अनुरूप गेहूं खरीदने के लिए 50 हजार क्विंटल का लक्ष्य दिया गया है। शासन ने किसानों के लिए 25 लाख रुपये भी खाते में भेज दिए हैं। अभी तक एक भी किसान अपना गेहूं खरीद केंद्र पर नहीं लाए हैं।
उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से गेहूं खरीद का लक्ष्य हरहाल में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। अभी गेहूं की कटाई चल रही है। कटाई पूरी होने के बाद मई में सबसे अधिक गेहूं की आवक होती है। हालांकि इस बार सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य 1625 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, जबकि मंडी में नया गेहूं 1580 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बिक रहा है। किसानों को अपने साथ जोतबही और बैंक पासबुक की फोटो कॉपी लानी होगी। खरीद के दौरान तौल होने के बाद तत्काल किसान को चेक के माध्यम से भुगतान कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभी तक उनके खरीद केंद्र पर बोहनी तक नहीं हुई है।