मानीमऊ क्षेत्र में एक कोल्ड स्टोरेज में लगा आलू का ढेर।
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कन्नौज। शासन के आदेश पर एक नवंबर को खाली होने वाले शीतगृह 11 दिन बाद भी अभी तक खाली नहीं हो पाए हैं। अफसरों ने शीतगृह खाली कराने के लिए 10 नवंबर तक का समय मांगा था। इसके बाद भी शीतगृहों में आलू डंप है। सिर्फ मानीमऊ क्षेत्र के 27 शीतगृहों में करीब 20 हजार मीट्रिक टन आलू डंप है। वहीं विभागीय अफसर आंकड़ों को छिपाकर कुछ प्रतिशत आलू बचे होनेे की बात कह रहे हैं।
जिले में 135 शीतगृह हैं। 2019-20 में इनमें 9,37,437.23 मीट्रिक टन आलू भंडारित किया गया था। 31 अक्तूबर तक शीतगृहों से 8,43,693 मीट्रिक टन आलू निकाला जा चुका था। 10 प्रतिशत आलू शीतगृहों में भंडारित था। यह आलू करीब 93 हजार मीट्रिक टन था। सरकार ने बाजार में आलू की बढ़ी कीमतों व आलू डंप पर नियंत्रण के लिए 31 अक्तूबर तक आलू निकासी करने के आदेश दिए। डीएम राकेश कुमार मिश्र ने टीमें भी बनाई थीं। तमाम कोशिशों के बाद भी आलू बाहर नहीं निकल सका। ऐसे में जिला उद्यान विभाग ने पांच नवंबर को अंतिम रूप से 10 नवंबर तक सारे शीतगृहों को खाली कराने की बात कही। इसका भी समय बीत गया। आलू निकासी में तेजी नहीं आई। सूत्रों के मुताबिक सिर्फ मानीमऊ के 27 शीतगृहों में करीब 20 हजार मीट्रिक टन आलू डंप है। दूसरी ओर जिला उद्यान अधिकारी मनोज चतुर्वेदी का कहना है कि ज्यादातर आलू की निकासी हो चुकी है। शीतगृहों में कुछ ही आलू बचा है।
कोल्ड मालिक छिपा रहे तथ्य
शासन व प्रशासन के सख्त आदेश के बाद शीतगृह मालिक परेशान हैं। इन्होंने किसानों से 30 नवंबर तक अनुबंध किया हुआ है। ऐसे में वह आलू निकालेंगे तो किसान इसका विरोध करेंगे। अफसर शीतगृह मालिक पर दबाव देते हैं तो वह आलू भंडारण के सही तथ्य छिपाकर अधिक निकासी की बात बता देते हैं।
30 से पहले नहीं निकल सकेगा आलू
एक कोल्ड मालिक ने बताया कि भंडारित आलू किसान का है। जब तक किसान नहीं चाहेंगे, वह आलू नहीं निकालेंगे। प्रशासन कितना भी दबाव बना ले, वह 30 नवंबर से पहले आलू न निकालने को मजबूर हैं। बताया कि कम भंडारण वाले शीतगृहों में कुछ खाली हो चुके हैं।