कन्नौज। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत सामग्री मद की धनराशि का भुगतान दिसंबर 2022 से लंबित है। इससे 40 करोड़ रुपये का भुगतान अटक गया है। इस वित्तीय वर्ष के समाप्त होने में मात्र दो महीने शेष हैं पर भुगतान न होने से ग्राम प्रधानों और सामग्री आपूर्तिकर्ताओं (वेंडरों) की मुश्किलें बढ़ गई हैं, जिसके चलते ग्रामीण विकास कार्यों की रफ्तार थम सी गई है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2022 से मनरेगा सामग्री के लिए कोई भी धनराशि जारी नहीं की गई है। इस विलंब के कारण दैनिक मजदूरों को गांवों में काम मिलना मुश्किल हो गया है, जिससे उन्हें शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर होना पड़ रहा है। वहीं, सामग्री का भुगतान न होने से जिम्मेदार अधिकारी भी गांवों में विकास कार्य कराने में कोई विशेष रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
मनरेगा योजना के तहत अमृत सरोवर, मॉडल शाप, मनरेगा पार्क, खेल मैदान, आंगनबाड़ी केंद्र, खड़ंजा और नाली निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विकास कार्य कराए जाते हैं। 40 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान के कारण इन कार्यों को गति नहीं मिल पा रही है। ठेकेदार, प्रधान और अन्य संबंधित लोग भुगतान के लिए कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। आर्थिक तंगी से जूझ रहे वेंडर और प्रधान सामग्री आपूर्तिकर्ता स्थानीय व्यापारी अपनी पूंजी फंस जाने के कारण दिवालियेपन की कगार पर हैं। वहीं, ग्राम प्रधानों पर भी अधूरे कार्यों को पूरा कराने का दबाव बढ़ रहा है, लेकिन भुगतान न होने के कारण उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा है।
वर्जन
उच्चाधिकारियों को इस संबंध में जानकारी दी जा चुकी है। कहा कि बीते तीन सालों से ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू होने से भुगतान में विलंब हो रहा है। जल्द ही भुगतान मिलने की संभावना है। जल्द ही पैसा आने की उम्मीद है।
-दिनेश कुमार, डीसी मनरेगा