पॉलिसी के नाम पर करोड़ों का घोटाला कर फरार चल रहे एकेबीएल ग्रुप का संचालक संजय शाक्य आखिरकार एक साल बाद पुलिस के हत्थे चढ़ गया। करोड़ों की जालसाजी के मामले में अभी भी कई आरोपी पुलिस की पकड़ से दूर हैं। पुलिस ने आरोपी को एसीजेएम कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया।
नगर के मोहल्ला भैनपुरा निवासी एकेबीएल ग्रुप के संचालक संजय शाक्य ने अपने आवास पर करीब छह वर्ष पहले संस्था खोलकर एनजीओ का कार्य शुरू किया था। उसी दौरान उसने एलआईसी की जीवन मधुर पॉलिसी की एजेंसी ली थी। उसने इस पॉलिसी के नाम पर करीब साढ़े पांच सौ एजेंटों को जोड़ा। उनके माध्यम से नगर और गांव क्षेत्र के लोगों के खाते खोलकर उनसे रुपया जमा कराना शुरू किया। संचालक ने यहीं से जालसाजी का काम शुरू कर दिया।
उसने ग्राहकों के साथ अभिकर्ताओं को भी अंधेरे में रखकर ग्राहकों की पहली किश्त तो जीवन मधुर पॉलिसी में जमा कराई। उसके बाद बांड मिलने पर दूसरी किस्त से आने वाला पैसा अपनी संस्था में जमा करने लगा। उसके बाद रसीद भी अपने ही एनजीओ की देने लगा। अभिकर्ताओं को जब इसकी जानकारी हुई तो उन लोगों ने संचालक पर भुगतान का दबाव बनाना शुरू किया। इस पर उसने उन्हें टरकाना शुरू कर दिया। भुगतान नहीं होने पर अभिकर्ताओं का सब्र टूट गया और 16 अगस्त 2014 को सैकड़ों की संख्या में अभिकर्ताओं ने कार्यालय पर धावा बोल दिया।
संचालक को बंधक बनाकर जमकर हंगामा किया। पूरे दिन चले हंगामे के बाद पुलिस की मौजूदगी में लिखा-पढ़ी में समझौता हुआ। कोतवाली पुलिस ने संजय शाक्य को नजरबंद कर उसके आवास पर पुलिस बल तैनात कर दिया था। इसके 11 दिन बाद 27 अगस्त को वह अपने परिवार के साथ पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। इसकी जानकारी होने पर अभिकर्ताओं ने अगले दिन संचालक की मां को सौरिख तिराहा से पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। 28 अगस्त को जालसाजी मामले की कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
उधर अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर एनजीओ संचालक ने मामले की विवेचना छिबरामऊ कोतवाली से कानपुर देहात की कोतवाली माती ट्रांसफर करवा दी। वर्तमान में माती पुलिस विवेचना कर रही है। हालांकि परेशान एजेंटों का विरोध रंग लाया और मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के लिए कानपुर की क्राइम ब्रांच को भी विशेष रूप से जिम्मेदारी सौंपी गई थी। क्राइम ब्रांच टीम ने मुख्य आरोपी संजय शाक्य को दिल्ली से दबोच लिया। हालांकि कागजी कार्रवाई में पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी नगर के रोडवेज बस स्टैंड से दिखाई है। पुलिस ने आरोपी का डाक्टरी परीक्षण कराने के बाद उसे एसीजेएम कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है।
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संचालक पर दो बार हुई 82 की कार्रवाई
एक वर्ष से फरार चल रहे घोटालेबाज एनजीओ संचालक संजय शाक्य और अन्य आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने दो बार कुर्की से पूर्व की 82 की कार्रवाई भी कर चुकी है। कोतवाली पुलिस ने 18 दिसंबर 2014 को आरोपियों के आवासों पर कुर्की के नोटिस चस्पा किए थे। इससे पहले सभी आरोपियों के खिलाफ कोतवाली पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट की भी कार्रवाई की थी। विवेचना ट्रांसफर हो जाने के बाद माती कोतवाली पुलिस ने आठ अगस्त 2015 को 82 की कार्रवाई के नोटिस उनके आवासों पर चस्पा कराई थी।
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कई एनजीओ कर रहा था संचालित
मोहल्ला भैनपुरा निवासी संजय शाक्य एकेबीएल ग्रुप के नाम से कई एनजीओ संचालित कर रहा था। उसने एकेबीएल लाइफ केयर मीडिया प्रा.लि., एकेबीएल फाइनेंशियल कंसलटेंट प्रा.लि. और एकेबीएल महिला कल्याण समिति के नाम से एनजीओ चला रहा था। उसने लोगों को गुमराम करने के लिए कानपुर और लखनऊ में भी अपना कार्यालय खोल रखा था। अधिकारियों में दबदबा बनाने के लिए वह अंग्रेजी के एक समाचार पत्र और पत्रिका का भी संपादन कर रहा था।
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लालच देकर एजेंटों को फंसाया
एकेबीएल संस्था एजेंटों को अच्छा कमीशन और बेहतर उपहार देकर उन्हें अपने साथ जुड़ने के लिए लुभाती थी। सिप और फिक्स डिपाजिट स्कीम में लक्ष्य पर कमीशन मिलता था। जिसमें सुपरवाइजर जिसके नीचे पांच एजेंट काम करते हैं। उसका लक्ष्य 25 हजार था और कमीशन 0.5 प्रतिशत, सब इंचार्ज के अंडर में दस एजेंट होते थे। उनका लक्ष्य 50 हजार और कमीशन 0.75 प्रतिशत था। इसी तरह अगर लक्ष्य दो लाख है तो कमीशन दो प्रतिशत दिया जाता था। तीन लाख जमा करने पर फ्रिज, पांच लाख जमा करने पर लैपटाप, दस लाख पर मोटर साइकिल उपहार में देने की व्यवस्था थी।
घर छोडने को मजबूर हो गए एजेंट
एकेबीएल ग्रुप के लिए काम करने वाले कई एजेंट ग्राहकों के पैसा वापसी का दबाव बनाने पर घर छोड़ने को मजबूर हो गए। ग्राम बहवलपुर के प्रमोद कुमार तिवारी बढ़ते दबाव को देखकर घर में ताला डालकर परिवार सहित गांव छोड़ गया। सराय गूजरमल के जितेंद्र सिंह चौहान परिवार के साथ कहीं अज्ञात स्थान पर चले गए। उन्होंने अपने ग्राहकों के माध्यम से करीब 13 लाख रुपये जमा कराए थे। नईबस्ती नार्मल निवासी राजेश कुमार और ग्राम अकबरपुर के यूनिस खान समेत कई अन्य एजेंट अपने परिवार के साथ बाहर है।
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15 के खिलाफ गैंगेस्टर की कार्रवाई
करोड़ों के घोटाले के आरोपी नगर के मोहल्ला भैनपुरा निवासी संजय शाक्य, उसकी पत्नी रूचि शाक्य, पिता भारतलाल, मां आदर्श कुमारी, भाई अजय, विजय, उनकी पत्नी गायत्री, रमाकांती, जनपद एटा के ग्राम नगला शेरू निवासी ससुर ओमप्रकाश, साला पवन शाक्य, रंजन, आशीष, ग्राम रंपुरा निवासी भांजा राजवीर शाक्य, अन्य रिश्तेदार सरायदौलत निवासी दीपू, मैनपुरी के ग्राम कन्हई नगला निवासी वीरेंद्र के खिलाफ कोतवाली पुलिस ने गैंगेस्टर एक्ट के तहत 25 दिसंबर को कार्रवाई की थी।
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अभी भी 15 अभियुक्त हैं गिरफ्त से दूर
एनजीओ संचालक संजय शाक्य की पत्नी रूचि शाक्य, पिता भारतलाल, भाई विजय शाक्य, उसकी पत्नी रामकांती, एक अन्य भाई की पत्नी गायत्री, ससुर ओमप्रकाश, साला पवन शाक्य, आशीष, भांजा राजवीर, अन्य रिश्तेदार वीरेंद्र, मामा चैतन्य देव शास्त्री, अपूर्वा बौद्ध, वीके श्रीवास्तव, एसके शर्मा और केके तिवारी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं। पुलिस अभी तक मुख्य संचालक संजय शाक्य, उसकी मां आदर्श, भाई अजय, साला रंजन और दीपू को ही गिरफ्तार किया गया है।