कन्नौज। इत्रनगरी में मंगलवार की शाम को अचानक बदले मौसम ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण जिले के विभिन्न हिस्सों में तेज बर्फीली हवाओं के साथ बारिश हो रही है। इस वजह से कड़ाके की सर्दी बढ़ गई है और लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं। इस मौसमी बदलाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि आलू और सरसों की फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। वहीं गेहूं की फसल को कुछ हद तक संजीवनी मिली है।
सुबह से ही आसमान में बादल छाए हुए थे, जो शाम तक तेज बारिश में तब्दील हो गए। 11 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हवाओं के कारण ठंड का अहसास और बढ़ गया है। बारिश के बाद न्यूनतम तापमान 12 से गिरकर 8-9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। किसानों के अनुसार गेहूं की फसल के लिए यह बारिश आंशिक रूप से फायदेमंद हो सकती है पर आलू और सरसों के लिए आपदा से कम नहीं है। खेतों में जलभराव से आलू के सड़ने का खतरा मंडरा रहा है, वहीं तेज हवाओं के कारण सरसों की तैयार फसल के खेतों में बिछ जाने की आशंका है। सब्जियों की फसलें भी इस बारिश से खराब हो सकती हैं।
मौसम विभाग का यलो अलर्ट जारी
मौसम विभाग ने पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव को देखते हुए 30 जनवरी तक भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव अभी कम नहीं हुआ है और आसमान में बादल छाए रहने के साथ तापमान में और गिरावट आ सकती है। कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक डॉ. अमरेंद्र कुमार के अनुसार, जिले में अब तक पांच मिमी बारिश दर्ज की गई है जो सर्दियों के मौसम में सामान्य से अधिक है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि वे फिलहाल फसलों की सिंचाई स्थगित कर दें। ताकि तेज हवाओं के कारण फसल गिरने का खतरा कम हो सके।
किसानों को जल निकासी की सलाह
फसल विशेषज्ञ डॉ. अरविंद कुमार ने किसानों को खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था करने की सलाह दी है। ताकि बारिश के कारण होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। बर्फीली हवाओं के चलने से लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है, जिसके चलते बाजारों में सन्नाटा पसरा है और सड़कों पर आवाजाही काफी कम हो गई है।