गंगेश्वरनाथ मंदिर परिसर स्थित मां गायत्री यज्ञशाला में कार्तिक पूर्णिमा पर तुलसी- सालिग्राम का विवाह धूमधाम से हुआ।
यज्ञशाला में एकत्र हुई महिलाओं ने यज्ञ व तुलसी पूजन कर वस्त्र एवं आभूषणों से तुलसी का श्रृंगार किया तथा सालिग्राम को भी फूलों से सजाया। दूल्हा बने सालिग्राम और दुल्हन बनी तुलसी की छटा देखते ही बन रही थी।
महिलाओं ने ढोलक की थाप पर भजन गाए ...मेरे खुल गए भाग्य मिली तुलसी, ...नमो-नमो तुलसी महारानी, ...सालिग्राम दूल्हा, दुल्हन बनी तुलसा मइया, ...बिन तुलसी हरि एक न मानी, ...जय जय जय तुलसा महारानी। इसके बाद बैंड बाजों के साथ सालिग्राम को मंदिर परिसर में घुमाया गया। भक्तगण बारी-बारी से उन्हें अपने सिर पर लेकर चल रहे थे।
भक्ति गीतों पर महिलाओं और युवतियों ने जमकर डांस किया। पंडित शिवानंद द्विवेदी ने वेद मंत्रोच्चार के साथ तुलसी और सालिग्राम की भांवरें डलवाईं तथा विवाह के सप्त वचनों बखान किया। प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
इस अवसर पर मीरा, हीरा, सुमन, मिथलेश, कमलेश, शिखा, निधि, राधा, मधू, सुधा, राजरानी, रानी, शिक्षा, गीता, प्रशांत तिवारी चंदन, उमेश चंद्र, महंत ददुआ जी, कैलाश बाबू, भानुप्रताप सिंह, बाबा भगवानदास, अमर, अजय, मयंक, सुधीर, शिवकरन सिंह आदि मौजूद रहे।