जसौली ग्राम पंचायत में तालाब का सुंदरी करण करती महिलाएं
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कन्नौज। आधी आबादी को काम देने पर जोर दिया जा रहा है। कोरोना संकट काल में गैर राज्यों से लौटे प्रवासियों में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं। मनरेगा में महिलाओं की कम से कम 33 प्रतिशत भागीदारी होनी चाहिए, लेकिन जिले में 10 प्रतिशत से कम महिलाएं ही काम पा रही हैं।
शासन की तमाम कवायद के बाद भी अधिकांश जिलों में मनरेगा में महिलाओं की संख्या बढ़ने की बजाय कम होने लगी। इससे शासन ने जिला स्तर पर मनरेगा में महिलाओं की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया है। इसके बाद मेें जिले में कुछ स्थिति सुधरी, लेकिन बाद में हालात पूर्ववत हो गए। जिले में डेढ़ लाख जॉब कार्डधारक हैं। 69217 हजार मानव दिवस सृजित किए किए गए। इसमें अभी तक 10 प्रतिशत महिलाओं को ही रोजगार मिला है, जबकि शासन के निर्देशानुसार 33 प्रतिशत होना चाहिए।
पुरुषों को अधिक मिलता है काम : मेहनत में पुरुषों ने महिलाओं को पीछे ढकेल दिया है। यही वजह है कि प्रधान और सचिव मनरेगा में महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों को ज्यादा काम दे रहे हैं। मनरेगा के तहत मिट्टी से संबंधित काम कराया जाता है। जिम्मेदारों का तर्क है कि मिट्टी उठाने आदि के काम में पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं कम काम कर पाती हैं।
मनरेगा के डीसी रामसमुझ ने कहा कि मनरेेगा के तहत मिट्टी का काम कराया जा रहा है। शासन ने इसमें महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने पर बल देने के निर्देश दिए हैं। आने वाले समय में अधिक से अधिक महिलाओं को काम दिया जाएगा।