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मनु के सपने को उड़ान का इंतजार

Fri, 05 Feb 2016 12:02 AM IST
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
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ग्रामीण परिवेश में पली मनु पाल ने ऐसे खेल को अपना करियर बनाया, जिसकी उत्तर प्रदेश में पिच तक नहीं है। अपने संघर्षों के बलबूते मनु जहां पहले देश में अपना नाम रोशन किया, वहीं अब गैर देशों में भी भारत का झंडा बुलंद किए हैं। मनु के मन में सपने तो बहुत हैं, बस जरूरत है, सपनों को पंख देने की।
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विशुनगण क्षेत्र के एक छोटे से गांव भरतपुर की रहने वाली मनु पाल के पिता सीआरपीएफ में असम में तैनात थे। ग्रामीण अंचल में पढ़ी मनु रोजमर्रा के खेलों से ही रूबरू होती रहीं। इस दौरान वह अपने पिता के साथ असम चली गई। वहां उसने नया खेल देखा लॉन बाल का।

मनु ने जब पहली बार यह खेल खेला तो अजीब सा लगा, पर मन में ठान लिया कि इस खेल को खेलेंगी जरूर। दो दिन बाद ही खेल सीख लिया और मैदान में डटे खिलाड़ियों को टक्कर भी दी। इसके बाद मनु पाल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अंतरराज्यीय प्रतियोगिता में असम की तरफ से खेलकर असम को जीत दिलाई।
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इसके बाद 34वें नेशनल कामनवेल्थ गेम्स 2011 में अपनी टीम के साथ गोल्ड मेडल जीता। केरल के अन्नाकुणम में हुए 35वें राष्ट्रीय खेलकूद में भी मनु ने स्वर्ण पदक जीता था। 2013 में मनु ने आस्ट्रेलिया जाकर कोच की डिग्री भी हासिल की। अब बुरुनई दारुस्लाम में 11वीं एशियन लॉन बाल प्रतियोगिता में मनु को भारत की टीम में चयनित किया गया।

24 जनवरी से एक फरवरी तक चली प्रतियोगिता में मनु ने कांस्य पदक जीत कर विदेश में तिरंगा लहरा दिया। मनु पाल की इस उपलब्धि पर देश की तमाम हस्तियों ने बधाई दी है। मनु का कहना है कि सरकारें अगर साथ दें तो वह आस्ट्रेलिया के इस प्रमुख खेल में भी विदेशों में भारत का परचम लहरा दें।

बताया कि उनकी टीम में मध्यप्रदेश और पंजाब के भी खिलाड़ी थे। पंजाब और मध्यप्रदेश की सरकारों ने इस खेल के लिए अलग से ग्राउंड बनाने के निर्देश दिए हैं। अब उत्तर प्रदेश सरकार भी इसके लिए निर्देश दें तो इस खेल के लिए यूपी से और प्रतिभाएं निखरें।

वहीं केंद्र सरकार को भी अन्य खेलों की तरह इस खेल को बढ़ावा देना चाहिए। कहा कि अखिलेश सरकार ने सीएम आवास पर बुलाकर यश भारती पुरस्कार और आर्थिक मदद की घोषणा की थी, पर अभी तक मनु पाल को न तो पुरस्कार मिला है और न ही आर्थिक मदद।
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