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मजदूरी करा ली, नहीं किया भुगतान

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कन्नौज। कोरोना काल में मजदूरों से काम करा लिया गया। एक माह से इन्हें भुगतान नहीं मिला है। इससे 8954 मनरेगा मजदूर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। वहीं अफसर बजट न होने का रोना रो रहे हैं। भुगतान न होने की समस्या से एक माह में मजदूरों की संख्या करीब एक हजार कम हो गई है।
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महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना के तहत जिले में करीब एक लाख से अधिक मजदूर पंजीकृत हैं। कोरोना काल में घर लौटे करीब 13 हजार लोगों को मनरेगा से जोड़ा गया था। वर्तमान में 20 हजार से अधिक मजदूर काम कर रहे हैं। इनमें जिले के आठ ब्लाकों में 8,956 मजदूराें को करीब 24 दिन से अधिक समय से भुगतान नहीं मिला है। नियम के तहत मजदूरों को आठवें दिन भुगतान करने की समय सीमा है। इसके तहत मजदूरों के खाते में प्रतिदिन के हिसाब से 201 रुपये भेजे जाने होते हैं। समय से भुगतान न होने से मजदूरों का काम करने में मन नहीं लग रहा है। इससे यह मनरेगा से कन्नी काटने लगे हैं।
दूसरे काम करने लगे मनरेगा मजदूर
मनरेगा में समय से भुगतान न मिलने से मजदूर दूसरे कामों को तलाश करने लगे हैं। ज्यादातर आलू की गुड़ाई में लग गए हैं। मनरेगा में 201 की जगह इन्हें करीब 300 रुपये मिल रहे हैं। शाम या दूसरे दिन भुगतान हो जाता है।
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इतने मजदूरोें का लटका है भुगतान
ब्लाक मजदूर
जलालाबाद 403
उमर्दा 833
सौरिख 1592
कन्नौज 1588
छिबरामऊ 1719
तालग्राम 819
हसेरन 1693
गुगरापुर 307
कुछ श्रमिकों का भुगतान लटका है। बजट की समस्या आ रही है। उच्चाधिकारियों को पत्राचार कर दिया गया है। जल्द मजदूरों के खाते में रुपये भेज दिए जाएंगे। मजदूरों की संख्या बढ़ाने के लिए बीडीओ को लिखा गया है।
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-आरएन सिंह, सीडीओ।
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