पुलिस और प्रशासन ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए
कागजी घोड़े चाहे जितने ही दौड़ाए हों, बड़े-बड़े दावे भी किए हों, पर
जमीन पर उसकी कितनी तैयारी थी, यह सबके सामने आ गया।
शहर में तीन महीने
के भीतर हुए दूसरे बड़े बवाल के दौरान नवरात्र समापन, विजय दशमी व मोहर्रम
मनाया जा रहा था। खासतौर से मोहर्रम को शांतिपूर्वक संपन्न कराने के लिए
जिले के सभी थाना, कोतवाली व चौकी क्षेत्र में 28 सेक्टर मजिस्ट्रेट तैनात
किए गए थे। इनको जिम्मेदारी दी गई थी कि तैनाती वाले स्थल पर रहकर क्षेत्र
में शांति व्यवस्था बनाए रखेंगे।
सेक्टर मजिस्ट्रेट के अलावा तीनों एसडीएम
को जोनल मजिस्ट्रेट पद का भी दायित्व सौंपा गया था। डीएम अनुज कुमार झा ने
मोहर्रम की चौथी, पांचवीं, छठी, सातवीं, आठवीं, नौवीं व दशमी को सभी
मजिस्ट्रेटों की ड्यूटी प्रभावी रहने के आदेश दिए थे। गुरुवार को बवाल
वाले दिन मोहर्रम की आठवीं तारीख थी।
बवाल भले ही मां दुर्गा मूर्ति
विसर्जन यात्रा में हुआ हो, पर सेक्टर व जोनल मजिस्ट्रेटों ने मामले को
गंभीरता से नहीं लिया। कन्नौज सदर कोतवाली में सेक्टर मजिस्ट्रेट के रूप
में डिप्टी कलक्टर राजेश यादव, चौकी कला में तहसीलदार राजेश कुमार, चौकी
सरायमीरा में डीआरडीए पीडी एके सिंह कुशवाहा, चौकी हाजी शरीफ में नायब
तहसीलदार रामकरन वर्मा, मकरंदनगर चौकी में जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी
रावेंद्र सिंह यादव, मानीमऊ चौकी में डीडी कृषि डॉ. राजेश कुमार व कुसुमखोर
बांगर में जिला कार्यक्रम अधिकारी राजीव सिंह को लगाया गया है।