मतदान केंद्रों पर मतदानकार्मिकों के भोजन के लिए रसोइयों का इंतजाम किया गया था। अधिकतर स्कूलों के रसोई घरों में ताले लटके रहे। कुछ जगह कार्मिकों ने ही रसोइयों को आने से मना कर दिया। गांव से चाय-नाश्ता का इंतजाम हुआ।
तिर्वा तहसील क्षेत्र के प्राथमिक स्कूल कचाटीपुर के बूथ नंबर 239 मतदान केंद्र पर पूर्वाह्न 11:25 बजे तक रसोई घर नहीं खुला था। यहां न तो रसोइया ही दिखे। कुछ ग्रामीण केतली में चाय लाए थे, पुलिसकर्मियों व मतदान कार्मिकों को कप में चाय व नाश्ता कराया जा रहा था।
प्रशिक्षण के दौरान डीएम अनुज झा ने बाहर का खाना व नाश्ता करने से मना किया था, पर उनका निर्देश मतदानकार्मिकों ने हवा में उड़ा दिया। मतदान केंद्र प्राथमिक स्कूल गोपालपुर में दोपहर 1:38 बजे रसोई घर बंद था। यहां भी खाना नहीं बना। एक मतदान कार्मिक ने बताया कि शाम को रसोईया आया था, पर उन्होंने मना कर दिया।
भोजन का इंतजाम हो गया, लेकिन भीड़ की वजह से भोजन नहीं कर पाया है। इंदरगढ़ के मतदान केंद्र पर जरूर महिला रसोइयों ने बताया कि वह दाल, चावल व सब्जी आदि बना रहीं हैं। यहां पर तीन रसोइयां काम करने में जुटी थीं। हालांकि, पुलिस व मतदान कार्मिकों को एजेंट की देखरेख में चाय कपों व प्लास्टिक गिलासों में भरकर बांटी जा रही थी।
उधर, प्राथमिक स्कूल बहोसी में मतदान करने से पुरुषों को रोक दिया गया। गुरुवार को मतदान के दौरान बहोसी केंद्र पर पूर्वाह्न 11:55 बजे महिलाओं व पुरुषों की लंबी-लंबी लाइनें लगीं थीं। महिलाएं तो वोट डाल रहीं थीं, पर पुरुषों को रोक दिया गया। उनसे कहा गया कि पहले महिलाएं वोट डालेंगी।
पुरुष मतदाता अपनी-अपनी बारी का इंतजार करने के लिए जमीन पर ही बैठ गए। करीब डेढ़ घंटे बाद उनका नंबर आया। लाइन में बैठे मतदाता मजबूत सिंह ने बताया कि वह आधे घंटे से वोट डालने को बैठे हैं। एक अन्य ग्रामीण भी छोटे से बच्चे को लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहा था।
उस समय एसडीएम तिर्वा उदयवीर सिंह मौके पर थे। मतदान के दौरान एक पंक्ति पुरुष की तो दूसरी महिलाओं की लगती है। यहां मामला उल्टा ही था। इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया, जिससे कई पुरुष मतदाता वापस लौट गए।