इत्र नगरी में दुर्गा विसर्जन यात्रा के दौरान
फायरिंग से युवक की मौत के बाद पैदा हुआ बवाल अब थमने लगा है। लोगों में
सांप्रदायिक तनाव का अब खौफ दूर होने लगा है और जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर
लौटने लगी है। गुरुवार को शहर के सभी बाजारों की अधिकांश दुकानें खुली
रहीं।
ग्राहकों की भीड़ भी बाजार में पहुंचकर खरीदारी करने लगी है। इससे
माहौल फिर से खुशनुमा बनने लगा है। वहीं सुरक्षा के मद्देनजर चप्पे-चप्पे
पर पुलिस और पीएसी के जवानों की निगाहें आने-जाने वालों की गतिविधियों की
निगरानी करती रहीं। बुधवार की रात और गुरुवार का दिन पूरी तरह से शांत
रहने पर पुलिस, प्रशासन के साथ ही पब्लिक ने भी राहत की सांस ली। बुधवार की
रात कहीं से भी कोई अप्रिय घटना घटित होने की सूचना नहीं आई।
यही वजह रही
कि गुरुवार को शहर के बाजारों में दुकानें धड़ाधड़ खुलती चली गईं। कोतवाली
के निकट से लेकर गढ़ैया, ग्वालमैदान, फर्श रोड, बड़ा बाजार, लाखन तिराहा,
सब्जी मंडी, पीतल मंडी, सफदरगंज, अजयपाल रोड, कचहरी टोला, चिरैयागंज से
लेकर मकरंदनगर तक चौतरफा बाजार खुले थे।
ठेलिया और खोखानुमा दुकान से लेकर
बड़े-बड़े शापिंग माल तक के ताले खुल चुके थे। खुद पहुंचने के बाद
दुकानदारों ने फोन करके अपने यहां काम करने वाले कर्मचारियों को भी बुलाया। गुरुवार
दोपहर 12 बजते ही बाजारों में काफी रंगत आ चुकी थी। कहीं ग्राहक और
दुकानदार के मोलभाव का शोरगुल था, तो कहीं भीड़ के आने-जाने की खटपट गूंज
रही थी।
सन्नाटा छू-मंतर हो गया। सड़कों पर सवारियां ढोने वाले टेंपो के
स्टैंड पर भी राहगीरों की भीड़ लगी थी। चौड़ी गलियां सिकुड़ने लगी, क्योंकि
फुटपाथ के दुकानदार भी आकर रोजीरोटी कम कमाने के लिए डट गए। तांगा स्टैंड
पर भी शहर आने-जाने वालों की भीड़ नजर आई।
बाइकों से भी लोग बेरोक-टोक शहर
की तरफ गए और शापिंग की। महिलाओं और पुरुषों के साथ ही बुजुर्ग एवं बच्चे
भी अपनी मनपसंद का सामान खरीदते दिखे। उधर, दंगे की चपेट में आकर जाम हुआ
इत्र उद्योग का पहिया भी चल पड़ा है। कारखाने के अंदर डेग व भभका फिर से
भट्ठी पर पहुंच गए।
मजदूरों और श्रमिकों ने लकड़ी डालने के बाद आग
जलाकर इत्र उत्पादन की कवायद शुरू कर दी। घरों में बनी रखीं अगरबत्ती
फैक्ट्री पहुंचीं, वहीं कारखाने से कच्चा माल कारीगरों तक पहुंचा। पैकिंग
भी शुरू कर दी गई। गांवों से फूल लाकर किसान भी इत्र उद्यमियों के पास आने
लगे।