खेत में आलू खुदाई के बाद भराई करते किसान ।
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जिले के ज्यादातर कोल्ड स्टोरेज आलू से फुल हो गए हैं। कोल्ड स्टोरेज मालिकों ने आलू रखना बंद कर दिया है। इससे किसान शीतगृहों से ट्रैक्टर ट्रालियां लेकर लौट रहे हैं। इन्होंने व्यापारियों को आलू बेचना शुरू कर दिया है।
जिले में इस बार शासन ने 11 लाख मीट्रिक टन पैदावार का लक्ष्य रखा था। 50 हजार हेक्टेयर में किसानों ने लक्ष्य से ज्यादा 14 लाख 45 हजार 986 मीट्रिक टन पैदावार की। ज्यादा पैदावार और बेहतर भाव न मिलने से किसानों ने खुदाई कर कोल्ड स्टोरेज में भंडारण शुरू कर दिया। मौजूदा समय जिले के 142 शीतगृहों में 10 लाख 62 हजार 77 मीट्रिक टन भंडारण पूरा कर लिया गया। ज्यादातर कोल्ड स्टोरेज फुल हो गए हैं। मालिकों ने अब भंडारण न करने का नोटिस चस्पा कर दिया है। इससे खुदाई कर भंडारण के लिए ट्रैक्टर-ट्राली लेकर पहुंच रहे किसानों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
भंडारण के लिए शीतगृह संचालकों से जुगाड़ भी लगाई जा रही है। समस्या का समाधान न मिलते देख किसानों ने सस्ते दामों पर व्यापारियों को बिक्री शुरू कर दी है। जिला उद्यान अधिकारी मनोज कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि जिले के ज्यादातर कोल्ड स्टोरेज फुल हो गए हैं। किसान परेशान न हों। पड़ोसी जनपदों के कोल्ड स्टोरेज में आलू भंडारित कराया जाएगा।
इस दफा दो हजार हेक्टेयर बढ़ा क्षेत्रफल
जिले में आलू का क्षेत्रफल लगातार बढ़ रहा है। पिछले साल 48 हजार हेक्टेयर में 10 लाख 35 हजार 300 मीट्रिक टन पैदावार हुई थी। इस बार 50 हजार हेक्टेयर में 11 लाख मीट्रिक टन पैदावार हुई है। जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि महंगाई के दौर में ज्यादातर किसानों ने आलू की पैदावार की है।
आरोप: व्यापारियों के आलू का हो रहा भंडारण
जिले के 142 शीतगृहों में आलू रखने की क्षमता 14 लाख 45 हजार 986 मीट्रिक टन है। अभी तक शीतगृहों में 10 लाख 62 हजार 77 मीट्रिक टन भंडारण हुआ है। किसानों का आरोप है कि कोल्ड स्टोरों में अभी आलू रखने की जगह है। मालिक व्यापारियों का आलू रख रहे हैं। इससे किसानों को परेशान होना पड़ रहा।
पहले से बारदाना लेने वाले किसानों को राहत
कोल्ड स्टोरेज मालिक पहले से बारदाना लेने वाले किसानों को राहत दे रहे हैं। यह अपना नुकसान बचाने के लिए इनका आलू भंडारित कर रहे हैं। अन्य किसानों का आलू भंडारण करने पर रोक लगा दी है।