कन्नौज। यह दो मामले बताते हैं कि बीमा कंपनियों और बैंक ने किसानों के साथ कैसे छल किया है। बीमा करते समय बिना पूछे बैंकों और बीमा कंपनियों ने मिलकर किसान से प्रीमियम ले लिया उन्हें मुआवजा देते समय परेशान किया।। हालत यह रही कि जिन किसानों की फसल बर्बाद हो गई उन्हें भी मुआवजा पाने के लिए अफसरों की चौखट पर चक्कर लगाने पड़े। खरीफ फसल 2018 में मौसम के साथ न देने से किसानों की फसलें तबाह हो गईं। तब 45 हजार 219 किसानों ने बीमा कराया था, डीएम की सख्ती के बाद मुआवजा देने की बारी आई तो बीमा कंपनियों ने 20 फीसदी को भी मदद मुहैया नहीं कराई।
वर्ष 2018 की खरीफ फसल में जिले के किसानों को जमकर परेशानियों से जूझना पड़ा था। कम बारिश के कारण जिले में खरीफ की फसल धान, मक्का और तिल को जबरदस्त नुकसान पहुंचा था। नतीजा यह हुआ कि किसान की आर्थिक हालात खस्ता हो गए। किसानों ने साहूकारों से जो कर्ज लिया था उसे चुकाने के लाले पड़ने लगे। वह उम्मीद में रहे कि बीमा है तो मुआवजा तो मिलेगा ही। लेकिन जब दो-तीन महीने तक कोई उनसे पूछने नहीं पहुंचा तो किसानों को आखिरकार निवर्तमान जिलाधिकारी रवींद्र कुमार के पास पहुंचकर अपनी समस्या बतानी पड़ी। तत्कालीन डीएम ने मामले को गंभीरता से लिया और बीमा कंपनियों के जिला स्तरीय अफसरों से लेकर लखनऊ तक बात की।
इसके बाद जब बीमा कंपनियां मुआवजा देने को राजी हुईं तो उन्होंने 45 हजार 219 किसानों में मात्र 8305 को ही मुआवजा दिया। यानि 20 फीसदी तक भी मदद नहीं पहुंच सकी। डीएम की सख्ती के बाद तब कुल तीन करोड़ 31 लाख 49 हजार 757 रुपये बांटे गए थे।