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खादी का बाजार ठंडा, जींस शर्ट की डिमांड

Tue, 17 Jan 2017 10:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूराो/कन्नौज
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खादी भंडार - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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चुनावी हलचल शुरू होने के बाद भी खादी का बाजार ठंडा है। नेताओं के लिए महासमर के मैदान में ये कवच पुराने हो गए हैं। नई पीढ़ी जींस व ब्रांडेड शर्ट को तवज्जो दे रही है। यही वजह है कि आज खादी भंडारों पर सन्नाटा है और शॉपिंग माल पर खरीदारों की भरमार है।
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खादी नेताओं की पहचान के साथ जुड़ी थी। चुनाव शुरू होते ही खादी की बिक्री का ग्राफ उठने लगता था। 1993 व 1996 के विधानसभा चुनावों के मौसम में खादी की बिक्री का आंकड़ा तीन लाख के ऊपर चला जाता था। इस बार चुनाव में 50 हजार की बिक्री भी नहीं हो पाई है। शहर के श्री गांधी खादी आश्रम के साथ ही सिकंदरपुर व गुरसहायगंज में भी यही हाल है।
चुनावी महासमर में उम्मीदवारों के साथ उतरी नेताओं की फौज में से पांच फीसदी ही खादी के शौकीन हैं।

वह भी महानगरों में ही खादी खरीदने जाते हैं। इस बदलाव से खादी आश्रम में खरीद फरोख्त ठंडी है, इससे यहां के कर्मचारी भी आहत हैं। खादी आश्रम के प्रबंधक देवप्रकाश यादव व कैशियर भंवर पाल सिंह यादव का कहना है कि वह इसके लिए आधुनिक पहनावे और नोटबंदी को जिम्मेदार मानते हैं।
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आंकड़े बता रहे हकीकत
गांधी आश्रम के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले वर्ष की तुलना में इस बार खादी की बिक्री पर लगभग 50 प्रतिशत की कमी आई है। कैशियर ने बताया कि नवंबर 2015 में लगभग ढाई लाख की बिक्री हुई थी, वहीं नवंबर 2016 में बिक्री एक लाख 46 हजार पर आकर अटक गई। इसी तरह दिसंबर 2015 में दो लाख 51 हजार 618 रुपये की बिक्री हुई। दिसंबर 2016 में यह बिक्री घटकर एक लाख 62 हजार 473 पर पहुंच गई। जनवरी 2016 में लगभग एक लाख 39 हजार रुपये की बिक्री हुई थी, जबकि इस वर्ष जनवरी का आधा माह बीत चुका है और अभी तक 50 हजार रुपये तक की बिक्री नहीं हो पाई है।
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