अब भले ही प्रदेश सरकार पॉलीथिन के रोक के प्रति
गंभीर हुई हो, पर खादी भंडार में हमेशा से ही पॉलीथिन के प्रयोग पर रोक लगी
रही। खादी भंडार की दुकानों पर सभी सामान को कागज में ही लपेट कर दिया
जाता हैं। यहां तक खादी मिशन से जुड़ा कोई भी कार्यकर्ता पॉलीथिन का प्रयोग
नहीं करता है।
पर्यावरण प्रदूषण पर पॉलीथिन की बढ़ती भागीदारी को लेकर
अब सरकार से लेकर कोर्ट चिंतित हुई है। खादी भंडार के कार्यकर्ता 50 साल
पहले से ही इसका बहिष्कार किए हुए थे। खादी मिशन ने पहले ही पॉलीथिन को
पर्यावरण के लिए खतरा बताते हुए प्रयोग पर रोक लगा दी थी।
इसके बाद से
प्रदेश के किसी भी खादी भंडार में पालीथिन का प्रयोग नहीं होता है। छोटे से
लेकर बड़ा सामान तक कागज में ही पैक करके दिया जाता है। खादी मिशन से
जुड़े सभी कार्यकर्ताओं को खादी कपड़े के ही झोले दिए गए थे जो उसका प्रयोग
बाजार से सामान लाने में करते हैं।
छिबरामऊ के गांधी आश्रम के शाखा
प्रबंधक देव प्रकाश यादव बताते हैं कि कई बार नए ग्राहकों ने उनसे सामान ले
जाने को पॉलीथिन की मांग की। इस पर वह लोग काफी सालों से लोगों से पॉलीथिन
के प्रयोग की जगह कपड़े के झोले या कागज की पैकिंग कराने की सलाह देते
हैं।
अब जब सुप्रीमकोर्ट के बाद प्रदेश सरकार ने भी रोक के आदेश दिए हैं तो
गांधी मिशन से जुड़े लोगों का एक सपना अब मूर्ति रूप लेने जा रहा है।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि वह लोग ही पॉलीथिन पर रोक लगाने और इसका प्रयोग
न करने का अभियान लेकर चले थे और आज कोर्ट से लेकर सरकार तक अब इस अभियान
में लग गई है।