छिबरामऊ। भूसा और दाना के अभाव में वृहद गो संरक्षण केंद्र में दो गोवंशों की मौत हो गई। भाकियू और हिंदूवादी नेताओं के हंगामे के बाद एसडीएम, तहसीलदार अभिमन्यु कुमार मौके पर पहुंचे। पोस्टमार्टम के बाद दोनों शव जमीन में दफन करवा दिए गए। एसडीएम ने गोवंशों को हर रोज कुछ समय के लिए बाहर चरवाने के निर्देश दिए हैं।
वृहद गो संरक्षण केंद्र में गुरुवार को दो गोवंशों की मौत हो गई थी। दो की हालत गंभीर थी। खुले में पड़े होने के कारण कौवों ने शवों को नोंचना शुरू कर दिया। शुक्रवार को गांव के लोगों की सूचना पर भाकियू (किसान) जिलाध्यक्ष राजा शुक्ला और हिंदूवादी नेता पुनीत दुबे युवाओं की टीम के साथ पहुंच गए। जिलाध्यक्ष का आरोप है कि गोशाला की चरनियों से भूसा और दाना नहीं था। देखरेख के अभाव में गोवंश मर रहे हैं। समय पर चिकित्सीय सुविधाएं भी मुहैया नहीं हो रही हैं।
हंगामे की सूचना पर एसडीएम देवेश गुप्त, नायब तहसीलदार अभिमन्यु कुमार, बीडीओ मनोज कुमार चतुर्वेदी और पशु चिकित्साधिकारी डॉ. मोहन सिंह, प्रधान रमेश शाक्य पहुंच गए। निरीक्षण में एसडीएम को केंद्र पर अव्यवस्थाएं मिलीं। उन्होंने नाराजगी जताते हुए पंचायत सचिव को फटकार लगा दी। पोस्टमार्टम के बाद गोवंशों के शवों को जमीन में दफन करवा दिया। इस गो संरक्षण केंद्र के निर्माण में लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी कई गोवंशों की मौत हो चुकी है। प्रशासन हर बार गोवंशों की मौत का कारण बीमारी बताकर पल्ला झाड़ लेता है।
चोट लगने से हुई थी गोवंशों की मौत: डॉ. मोहन
पशु चिकित्साधिकारी डॉ. मोहन सिंह ने बताया कि एक गोवंश चरनी पर चढ़ते समय गिरकर घायल हो गया था। दूसरे को अन्ना पशु ने घायल कर दिया था। दोनों का उपचार चल रहा था। गुरुवार को दोनों की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि गोशाला में हरे चारे के समुचित इंतजाम न होने के कारण गोवंशों को खुले में चरवाने की व्यवस्था की जाएगी।
सचिव के खिलाफ करेंगे कार्रवाई की संस्तुति
एसडीएम देवेश गुप्त ने बताया कि केंद्र पर पर्याप्त जगह होने के बाद भी पंचायत सचिव ने हरे चारे की बुवाई अब तक नहीं कराई है। केयर टेकरों के खाते न खुलने से मानदेय भी नहीं मिला है। इससे यह कार्य करने के लिए तैयार नहीं हैं। केंद्र पर एक भी रजिस्टर नहीं था। पंचायत सचिव की लापरवाही को देखते हुए कार्रवाई के लिए संस्तुति की जाएगी।