तालग्राम। ग्रेटर नोएडा में हुए सड़क हादसे ने परिवार की खुशियां छीन लीं। रनवां गांव में सोमवार की सुबह दरवाजे से जब तीन अर्थियां एक साथ उठीं तो चीत्कार मच गया। पूरा गांव परिजनों की वेदना देख रो पड़ा। एक घायल संतोष अभी भी अस्पताल में जीवन के लिए संघर्ष कर रहा है।
रविवार को हादसे की सूचना मिलते ही पूरे गांव में मातम पसर गया था। एक साथ प्रताप सिंह, पत्नी उषा देवी, भतीजे सत्यपाल की मौत से गांव गम में डूबा था। पोस्टमार्टम के बाद आधी रात तीनों शवों के गांव पहुंचते ही परिजनों का रोरोकर बुरा हाल रहा। लोग अपने आंसू नहीं रोक पा रहे थे। परिजनों ने बताया कि प्रताप सिंह अपने चार भाई मुन्नालाल, लालाराम, छोटेलाल में सबसे छोटे थे। दिल्ली में एक इलेक्ट्रानिक कंपनी में काम करते थे। उनके चार पुत्र सोनू, मोनू, रोहित की शादी हो चुकी है जबकि मनीष पढ़ाई कर रहा है।
एक ही चिता पर पंचतत्व में विलीन हुए पति पत्नी
सोमवार सुबह परिजन पांच बजे शवों को अंतिम संस्कार के लिए गंगाघाट श्रृंगीराम लेकर पहुंचे। प्रताप सिंह और पत्नी ऊषा देवी की एक ही चिता लगाई गई। बड़े बेटे सोनू ने माता-पिता को मुखाग्नि दी। शिवपाल ने बड़े भाई सत्यपाल को मुखाग्नि दी।
मां रही पुकार, बेटा कब लौटोगे
शनिवार शाम दिल्ली जाने से पहले प्रताप सिंह अपनी वृद्ध मां रामकली (82) के पैर छूते वक्त आशीर्वाद लेकर जल्द लौटने का वादा कर निकले थे। रो रो कर बेसुध मां बार-बार पुकार रही है बेटा कब लौटोगे। वह सिसकियां लेकर बार-बार बेहोश हो जाती हैं।