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कन्नौज जेल के बंदी पापड़-चिप्स बनाकर करेंगे कारोबार

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:कन्नौज का जिला कारागार । संवाद - फोटो : KANNAUJ
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कन्नौज। जल्द ही जिला जेल के बंदी उद्योगों का संचालन करते नजर आएंगे। जेलों की दशा सुधारने की कवायद में जिला कारागार में आलू के पापड़-चिप्स बनाने की फैक्ट्री लगाए जाने की कवायद शुरू हुई है। साथ ही यहां गोशाला संचालित करने पर भी विचार किया जा रहा है। इसको लेकर जेल अधीक्षक और उपायुक्त उद्योग ने संयुक्त रिपोर्ट शासन को भेजी है।
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प्रदेश सरकार ने सूबे की सभी जेलों में विभिन्न उद्योग लगाने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में बीती 13 मई को अपर मुख्य सचिव ने कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिए थे कि सभी जेलों में उद्योगों की स्थापना के लिए उपायुक्त उद्योग और कारागार अधीक्षक संयुक्त रूप से कार्य योजना तैयार करें। बीती 23 मई को कन्नौज के उपायुक्त उद्योग ने कारागार अधीक्षक के साथ मिलकर जेल परिसर का भ्रमण किया था। इसके बाद एक कार्य योजना बनाकर शासन को भेजी गई है। विभाग से जुड़े सूत्र बताते हैं कि कारागार में गोशाला बनाने और चिप्स-पापड़ उद्योग लगाए जाने की संस्तुति की गई है।
दरअसल, कन्नौज में आलू का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। जिला कारागार के आसपास भी किसान आलू की खेती करते हैं। जिले में लगभग 150 कोल्ड स्टोर होने के कारण आलू की उपलब्धता भी वर्ष भर रहती है।
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जिला कारागार में उपलब्ध मानव श्रम को देखते हुए घरेलू तरीकों और साधारण मशीनों के जरिये चिप्स और पापड़ बनाने का काम बड़े पैमाने पर किया जा सकता है।
चिप्स और पापड़ उद्योग लगाने में जिला कारागार में अधिकतम ढाई लाख रुपये खर्च होंगे। चिप्स और पापड़ बनाने के लिए बंदियों को किसी विशेष प्रशिक्षण की भी जरूरत नहीं होगी। इससे इतर गोशाला का निर्माण कराए जाने से जेल में दूध की आवश्यकता को पूरा किया जा सकेगा और बाकी बचने वाले दूध को आसानी से बाजार में खपाया जा सकेगा। साथ ही साथ इससे गोवंशों का संरक्षण भी होगा। यहां उल्लेखनीय है कि जेल परिसर में लगभग बीस एकड़ भूमि खेती के लायक भी है। इसमें मवेशियों के लिए हरे चारे की व्यवस्था हो सकेगी। इससे इतर उपले, कंडे बनवाकर इनकी बिक्री भी की जा सकती है।
इस पर भी हुआ विचार
जिला जेल में अगरबत्ती बनाने को लेकर भी विचार विमर्श हुआ, लेकिन अलग अलग तर्कों के चलते बात नहीं बन पाई। दरअसल, हाथ से बनने वाली अगरबत्ती की मांग बाजार में नहीं है। दूसरी तरह की अगरबत्ती बनाने के लिए मैनुअल पैडल मशीन बाजार में उपलब्ध हैं, लेकिन इसके लिए कच्चा माल जिला जेल से लगभग बीस किलोमीटर दूर से मंगाना होगा। इसके अलावा पैकेजिंग और मार्केटिंग और प्रशिक्षण को लेकर भी कई दिक्कतें आ रहीं हैं।
जिम्मेदारों की सुनिए
जिला कारागार अधीक्षक वीके मिश्रा ने बताया कि कारागार सुधार कार्यक्रम के तहत उद्योगों की स्थापना जेल में कराई जानी है। इसके जरिए बंदियों के कौशल का विकास करने, उनकी आय बढ़ाने की मंशा है। इसी उद्देश्य से पूरी कार्य योजना, कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाओं के पुलिस महानिदेशक को भेजी गई है।
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