कन्नौज। रूस-यूक्रेन के बीच हो रहे युद्ध का असर आम लोगों के साथ पशु-पक्षियों पर भी दिखने लगा है। साइबेरिया और ठंडे यूरोपीय देशों से सर्दियों में लाख बहोसी पक्षी विहार आने वाले प्रवासी पक्षियों की वतन वापसी में दिक्कत आ रही है। प्रवासी पक्षी सेंट्रल एशियन फ्लाईवे के माइग्रेशन रूट से यूरोप व एशियन देशों को लौटते हैं, मगर इस बार इनकी वापसी उस रफ्तार से नहीं हो रही, जैसी कि पहले होती रही है। जो निकल चुके हैं उनकी उड़ान जोखिम भरी है।
लाख बहोसी पक्षी विहार के केयर टेकर करन सिंह ने बताया कि युद्ध में हो रही बमबारी की वजह से विषैले धुएं और रेडिएशन से प्रभावित वातावरण से प्रवासी पक्षियों की अपने मूल स्थानों पर वापसी जीवन के लिए खतरनाक हो सकती है। माना जा रहा है कि बमबारी, रेडिएशन और फाइटर प्लेन की उड़ान की वजह से ही उनकी घर वापसी नहीं हो पा रही है। पक्षियों को मिले इस तरह के संकेत हैरान करने वाले हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध क्षेत्र के पास तीन फ्लाईवे हैं। इसमें सेंट्रल एशियन फ्लाईवे, वेस्ट एशियन-ईस्ट अफ्रीकन फ्लाईवे व ब्लैक सी-मेडिटेरियन फ्लाईवे जुड़ते हैं। इनमें पहले भारतीय उपमहाद्वीप में पक्षियों का माइग्रेशन होता है। भारत आने वाले प्रवासी पक्षी सेंट्रल एशियन फ्लाईवे के पांच माइग्रेशन रूट का इस्तेमाल आने और जाने के लिए करते हैं। इनमें से दो रूट यूक्रेन के आसपास के हैं। इसे ग्रीन रूट के नाम से जाना जाता है।
370 प्रजातियों के पक्षी आते
पक्षी विहार के केयर टेकर के मुताबिक सेंट्रल एशियन फ्लाईवे से 370 प्रजातियों के पक्षी आते हैं। इनमें से 310 प्रजातियों का जीवन वेटलैंड पर निर्भर है। ये फ्लाईवे भारत सहित 30 देशों को कवर करता है। इनमें से कुछ पक्षी लाख बहोसी में भी आते हैं। हालांकि अभी तक उनके पास ऐसी कोई जानकारी या रिपोर्ट नहीं आई है, जिसमें प्रवासी पक्षियों को नुकसान होने की बात कही गई है।
युद्ध क्षेत्र के वेटलैंड पर वापसी
रूस और यूक्रेन के बीच इस समय युद्घ चरम पर है। इस युद्ध क्षेत्र के वेटलैंड से कुछ प्रवासी पक्षी भारतीय उपमहाद्वीप में आते हैं। इनकी वापसी भी इन्हीं वेटलैंड पर होती है। पक्षियों के जानकार बताते हैं कि इनमें डक फैमिली के ग्रेलैग गूज, कॉमन शेल्डक, रूडी शेल्डक, मलार्ड, नोर्दन पिनटेल, नोर्दन शोवलर, गार्गेनी और कॉमन पोचार्ड प्रजातियां है।
kannauj,kannauj news- फोटो : KANNAUJ
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