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ठंड में घुड़का बीमारी का खतरा बढ़ा, दो की मौत

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तालग्राम। क्षेत्र के अमोलर में दो और मवेशियों की मौत रविवार को हो गई। अब तक क्षेत्र में करीब एक दर्जन मवेशी मर चुके हैं। सर्दी बढ़ने के मवेशियों में निमोनिया के साथ घुड़का रोग बढ़ रहा है। इन दिनों कई गांवों में मवेशी घुड़का बीमारी की चपेट में हैं। डॉक्टरों की टीम भी टीकाकरण कर रही है।
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पशुपालकों ने बताया कि बीमारी से पशुओं के गले में तकलीफ होने के साथ सांस लेने में दिक्कत पैदा होती है। इलाज में देरी हो जाने पर पशुओं की मौत तक हो जाती है। पशुओं में इन बीमारियों के बढ़ने से पशुपालक परेशान हैं। पशु चिकित्सक का कहना है कि पशुपालक थोड़ा ध्यान दें तो वे पशुओं को इन बीमारियों से बचा सकते हैं।
दिसंबर माह का दूसरा पखवारा शुरू होते ही सुबह और शाम के समय सर्दी भी तेवर दिखाने लगी है। सर्दी की वजह से यह बेजुबान निमोनिया और घुड़का जैसी बीमारी का शिकार हो रहे हैं।
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इलाके में रनवां, बरई, सुताह और नेकनामपुर गांव में एक दर्जन भैंस घुड़का और मुंहपका रोग से मर चुके हैं। तालग्राम चिकित्सा अधिकारी डॉ. विकराल का कहना है कि सर्दी के दिनों में पशुपालक गाय-भैंस व दूसरे जानवरों को बचाने के लिए पशुबाड़े में घासफूस और पुआल फैला देते हैं। यह उपाय तो ठीक है, लेकिन इसमें दिक्कत यह आती है कि पशुपालक बहुत समय तक घासफूस व पुआल बदलते नहीं है। पशु उसे गीला और गंदा करते रहते हैं। सर्दी में गीली घासफूस, पुआल से जानवर को निमोनिया होने का खतरा रहता है। साथ ही डायरिया की बीमारी भी बढ़ जाती है। पुआल को बदलते रहना चाहिए। टीका जरूर लगवाएं।
अब तक इनके मवेशियों की हुई मौत
रनवां गांव निवासी रामशरन जाटव की तीन भैंस, प्रमोद की एक भैंस एक पड़वा, पिंटू ठाकुर, श्यामू, और श्रीचंद्र की एक-एक भैंस, अमोलर के बृजेश की एक भैंस, अनिल पांडेय की एक गाय मर चुकी है। इसी तरह बरई, सुताह और नेकनामपुर में एक दर्जन भैंस घुड़का रोग से मर चुके हैं। (संवाद)
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