छत्तीसगढ़ के नक्सली हमले में शहीद हुए जवानों में जिले के सपूत रामपाल सिंह भी हैं। रविवार को होली वाले दिन तिरंगे में लपेटकर उनका शव गांव लाया गया तो हर चेहरे पर गम, गुस्से और गर्व के भाव थे। शाम करीब सात बजे राजकीय सम्मान के साथ छिबरामऊ कोतवाली क्षेत्र के परौर गांव में ही उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। मुखाग्नि उनके छोटे भाई राजीव ने दी। इस दौरान एसडीएम, एसपी आदि मौजूद रहे।
बड़े भाई राजेश कुमार यादव ने बताया कि रामपाल वर्ष 2004 में लखनऊ से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में बतौर कांस्टेबिल भर्ती हुए थे। डेढ़ साल से उसकी तैनाती छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित जिले सुकमा में थी। शनिवार को नक्सलियों से मुठभेड़ के दौरान रामपाल शहीद हो गए।
पिता विश्राम सिंह यादव गांव के प्रधान भी रह चुके हैं। उन्होंने बताया कि उनका छोटा बेटा राजीव पुलिस में है। राजीव ने शनिवार सुबह फोन पर रामपाल से बात की थी। रामपाल ने होली पर छुट्टी लेकर घर आने की बात कही थी। कौन जानता था कि उनका लाल होली के दिन ही तिरंगे में लिपटकर घर आएगा। उन्होंने कहा कि बेटे की शहादत पर गर्व है।
रामपाल की शादी 2007 में तिर्वा क्षेत्र के ग्राम गुनहा उमर्दा निवासी रिंकी से हुई थी। घर में पत्नी रिंकी और मां राजेश्वरी देवी सहित सभी का रो-रोकर बुरा हाल है। दो बच्चे सत्यम (पांच) और छोटा बेटा शुभम ढाई साल का ही है। बच्चे इस बात से अंजान हैं कि उनके सिर से पिता का साया उठ चुका है। सभी लोग रामपाल की शहादत और वीरता के किस्से याद कर रहे थे। गांव में उनके सहपाठी व अन्य ग्रामीण उनके साहस की चर्चा करते रहे।