फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kannauj Case: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आई सिपाही सचिन की मौत की वजह, दूसरे दिन भी साफ नहीं हुए खून के दाग

Wed, 27 Dec 2023 12:07 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, कन्नौज

सार

हिस्ट्रीशीटर अशोक यादव उर्फ मुनुआ उर्फ मुन्ना के घर के बाहर लगे मुख्य गेट के पास खून पड़ा हुआ था। गेट के पास में ही हिस्ट्रीशीटर के बेटे अभयराज उर्फ टिंकू का बैडमिंटन पड़ा था, जो खून से सना था। मुनुआ के घर के बाहर पड़े खून के दाग दूसरे दिन भी नहीं धुल पाए थे।
विज्ञापन
Kannauj Case - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

छिबरामऊ में पुलिस महकमे की चूक या स्वास्थ्य सेवा मिलने में लापरवाही... आखिर इन दोनों में सिपाही सचिन राठी की मौत का कारण कौन बना। यह लोगों की जुबान पर चर्चा का विषय है। विभागीय अधिकारी अब सभी बिंदुओं की पड़ताल की बात कह रहे हैं।
विज्ञापन


छिबरामऊ कोतवाल जितेंद्र प्रताप सिंह दो एसआई समेत 14 पुलिस कर्मियों के अलावा विशुनगढ़ थाने के दो सिपाही लेकर ग्राम धरनीधरपुर नगरिया में कुर्की नोटिस चस्पा करने की कार्रवाई के लिए पहुंचे थे। बड़ी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी के बाद आरोपी की गिरफ्तारी के लिए फिल्डिंग लगाने में कहीं न कहीं चूक होने के कारण सिपाही सचिन राठी को गोली लगी और उसे 100 शैय्या अस्पताल भिजवाया गया। 

यहां सुविधाओं का टोटा होने के कारण चिकित्सकों ने सिपाही की हालत नाजुक बताते हुए कानपुर के लिए रेफर कर दिया। हाईटेक पुलिस महकमे ने सिपाही को कानपुर ले जाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस का सहारा लिया। जो सड़कों पर महज 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ही दौड़ लगा सकती है। 
विज्ञापन


एंबुलेंस की धीमी गति के कारण सचिन राठी को कानपुर पहुंचने में अधिक का समय लग गया। अगर समय रहते सचिन कानपुर पहुंच जाता तो शायद उसकी जान बच सकती थी। जबकि अस्पताल में इमरजेंसी ड्यूटी में तैनात चिकित्सक ने खून का अत्यधिक तेजी से रिसाव होने की बात कहते हुए जल्द से जल्द से सिपाही को हायर सेंटर ले जाने की सलाह दी थी।
 

एंबुलेस की स्पीड की होगी जांच: एडीजी
हिस्ट्रीशीटर की फायरिंग से घायल हुए सिपाही सचिन राठी को 100 शैय्या अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां से चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे गंभीर हालत में कानपुर के लिए रेफर कर दिया। जो एबुलेंस सिपाही को कानपुर लेकर जाने के लिए लाई गई, उसकी स्पीड 60 किलोमीटर प्रति घंटा बंधी हुई थी। 

 

इस कारण सिपाही को कानपुर पहुंचने में समय लग गया। अब हर कोई यही कह रहा है कि यदि एबुलेंस में स्पीड होती तो शायद सिपाही की जान बच जाती। अब एडीजी आलोक कुमार ने डीएम शुभ्रांत कुमार शुक्ल को इस मामले की जांच के निर्देश हैं।

हिस्ट्रीशीटर, बेटे व पत्नी के खिलाफ दर्ज रिपोर्ट
छिबरामऊ के कोतवाल जितेंद्र प्रताप सिंह ने कोतवाली में मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई। जिसमें कहा गया कि 25 दिसंबर को वह एसआई प्रमोद तिवारी, राहुल शर्मा, संदीप सिंह गौतम, राजकुमार, महेंद्र, सुदर्शन, गजेंद्र, अर्जुन, पंकज कुमार, नरेश रावत, नरेश कुमार, प्रिया पवार के साथ विशुनगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम धरनीधरपुर नगरिया गांव में मुनुआ यादव का न्यायालय से जारी अधिपत्र लेकर गए थे। विशुनगढ़ के सिपाही सचिन राठी व नीरज कुमार पहले से ही क्षेत्र में रवाना था।

उन्होंने दोनों सिपाहियों के साथ मिलकर सोमवार की शाम को मुनुआ के घर पर दबिश दी तो उसके बेटे अभयराज उर्फ टिंकू, पत्नी श्यामा देवी घर से बंदूक व तमंचे से पुलिस पार्टी पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग करने लगे। जिसमें सचिन राठी की जांघ में गोली लग गई। पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर, उसके बेटे व पत्नी के खिलाफ संगीन धाराओं में मामले की रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
 

दूसरे दिन भी साफ नहीं हुए खून के दाग
हिस्ट्रीशीटर अशोक यादव उर्फ मुनुआ उर्फ मुन्ना के घर के बाहर लगे मुख्य गेट के पास खून पड़ा हुआ था। गेट के पास में ही हिस्ट्रीशीटर के बेटे अभयराज उर्फ टिंकू का बैडमिंटन पड़ा था, जो खून से सना था। मुनुआ के घर के बाहर पड़े खून के दाग दूसरे दिन भी नहीं धुल पाए थे।

 

फायर होने के बाद सकते में ग्रामीण
ग्रामीणों की मानें तो पुलिस और हिस्ट्रीशीटर के बीच सात से आठ राउंड फायर हुए। अचानक हुई फायरिंग से वह सकते में आ गए। अचानक से पुलिस की बढ़ती भीड़ को देख वह सभी घरों में दुबक गए। मंगलवार को भी गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ था। ग्रामीण अपनी छतों पर बैठे दिखाई दे रहे थे। हर किसी की जुबां पर इस प्रकरण की ही चर्चा थी।

 
विज्ञापन

फट गईं थीं पैर की नसें, अधिक खून बहने से हुई मौत
पोस्टमार्टम करने वाले बिधनू सीएचसी के डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि सिपाही के दाएं पैर की जांघ में गोली लगी थी। इसके चलते उसकी पैर की नसें फट गईं थीं। अधिक खून बहने से जान गई है। घायल सिपाही को कानपुर के रिजेंसी में भर्ती कराया था। वहां ऑपरेशन कर जांघ से गोली निकाल ली गई थी, लेकिन खून बहना बंद नहीं हुआ था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें