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जेवर बेचने के बाद बना राशनकार्ड और जाबकार्ड

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श्रीराम और गुड्डी देवी को राशन किट देतीं समाज सेविका अर्चना मिश्रा। - फोटो : KANNAUJ
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कन्नौज। लॉकडाउन में रोजी-रोटी के संकट से जूझ रहे श्रीराम के परिवार के हालात अब कुछ बेहतर हो गए। अमर उजाला ने परिवार की बेबसी को उजागर किया तो बुधवार को कई समाजसेवी मदद के लिए आगे आ गए। सरकारी मुलाजिमों ने उन योजनाओं का लाभ दिया, जिनसे वह अब तक वंचित थे। घर में पर्याप्त राशन और राशन कार्ड के साथ मनरेगा जॉबकार्ड मिलने के बाद श्रीराम और पत्नी गुड्डी देवी की आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने कहा कि वह बुरा वक्त आने पर तमिलनाडु जाने वाले थे। अब गांव नहीं छोड़ेंगे।
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फत्तेहपुर जसोदा के श्रीराम के नौ बच्चे हैं। लॉकडाउन में काम मिलना बंद हुआ तो पत्नी गुड्डी देवी और बच्चों के साथ तमिलनाडु से 18 मई को पैतृक गांव आ गए। गांव में जमीन न होने से आर्थिक संकट था। घर में दो जून की रोटी के लिए राशन नहीं था। बच्चे भूख से बिलख रहे थे। ऐसे में गुड्डी देवी ने तोड़ियां बेच दीं। बुधवार के अंक में अमर उजाला ने श्रीराम के परिवार की बेबसी को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद शहर की समाजसेवी अर्चना मिश्रा राशन लेकर पहुंचीं।
जलालाबाद के पूर्व ब्लाक प्रमुख और सपा नेता समाजसेवी रजनीकांत यादव ने श्रीराम को एक पैकेट गेहूं, एक पैकेट आलू, साबुन और गृहस्थी का सामान दिया। जलालाबाद के खंड विकास अधिकारी जेएन राव पंचायत सचिव विनीत शाक्य के साथ पहुंचे। उन्होंने राशन और रोजगार न मिलने पर जांच के लिए कहा। राशन कार्ड, मनरेगा जॉबकार्ड बनवाकर दिया। बीडीओ ने बुधवार को मनरेगा में काम करने के लिए कहा। श्रीराम और गुड्डी ने कहा कि अब वह गांव में रहकर काम करेंगे। यहीं बच्चों को पढ़ाएंगे।
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