सदानीरा कही जाने वाली ईशन नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है। नदी की कई जलधाराएं सूख गई हैं, जिससे तलहटी दिखाई देने लगी है। कई सालों बाद नदी का जलस्तर गिरने से क्षेत्र के किसानों को सिंचाई की चिंता सताने लगी है। किसानों का कहना है कि इस साल बारिश कम होने से नदी का जलस्तर लगातार गिर रहा है।
मैनपुरी जनपद की एक झील से निकली ईशन नदी जिले के कई हेक्टेयर भू-भाग को सिंचित करती हुई जनपद कानपुर में बिल्हौर के पास गंगा नदी में मिल जाती है। ईशन नदी को सदानीरा इसलिए कहा जाता है कि इस नदी में कभी भी पानी नहीं सूखता है, जबकि मैदानी क्षेत्र की कई नदियां गर्मियों में सूख जाती हैं। इसका मुख्य कारण यह भी है कि जनपद मैनपुरी के कस्बा तरिहा रामनगर में निचली गंगानहर पर एक तटबंध बनाया गया है, जब नहर में जलस्तर बढ़ जाता है तो उसे कम करने के लिए पानी को ईशन नदी में छोड़ दिया जाता है। यही वजह है कि ईशन नदी में कभी भी पानी कम नहीं रहता है। बरसात में तो यह नदी रौद्ररूप धारण कर लेती है। इस नदी का महत्व इसलिए और अधिक है कि इससे कई हेक्टेयर भू-भाग सिंचित होता है।
इस बार मार्च में ही नदी में पानी सूखने लगा है, जिससे किसानों के माथों पर चिंता की लकीरें उभर आईं हैं। ग्राम जरारा निवासी किसान विनोद शर्मा का कहना है कि इससे पहले 90 के दशक में एक बार नदी की जलधारा सूख गई थी, तब लोगों को सिंचाई के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था।
वहीं, पालपुर निवासी जय सिंह का कहना था कि इस नदी पर पंपसेट लगाकर हजारों किसान सिंचाई करते हैं। इस समय गर्मियों की मक्का की बुवाई चल रही है। यह फसल पूरी तरह से नदी के पानी पर ही निर्भर है। मालूम हो कि ईशन नदी के किनारे बसे गांव सरायप्रताप, बेहटा रामपुर, निवारी, कुसका, सराय ठेकू, मिर्जापुर आदि गांवों में भी किसानों के लिए सिंचाई का संकट उत्पन्न हो गया है।