मोहल्ला कस्साबान स्थित मदरसा वाजविद अल उलूम में एक
रोजा मोहसीने आजम कांफ्रेंस का आयोजन किया गया, जिसमें दूर जनपदों से आए
मौलाना हजरत ने अपने कलाम पेश किए।
कांफ्रेंस में शायरे इस्लाम हजरत
इस्माइल रागिबी ने, खून से चिराग दीन का जलाया हुसैन ने रस्में वफा को खूब
निभाया हुसैन ने शेर पेश किया। मदरसा संचालक मौलाना आदिल अली ने कहा कि
इस्लाम धर्म में मां और मुल्क को सबसे ज्यादा तवज्जो दी जाती है।
हमारे
हुजूर मोहम्मद साहब ने फरमाया कि जिस मुल्क में रहो वहां के लोगों और वहां
की मिट्टी से मोहब्बत करो। करहल से आए मौलाना मुबीन कादरी ने हजरत हुसैन की
शाहादत का जिक्र करते हुए कहा कि हजरत हुसैन ने करबला में अपनी और अपने
परिवार की जान की कुर्बानी दे दी, ताकि दुनिया में सच जिंदा रह सके और लोग
हमेशा हुसैन द्वारा बताए गए सच्चाई के रास्ते पर चलते रहें।
मदरसे के
मीडिया प्रभारी मोहम्मद जाहिद चिस्ती ने कहा कि कांफ्रेंस का आयोजन लोगों
में इल्म की जागरूकता के लिए किया गया है। आज के इस दौर में बच्चों को दीनी
व दुनियावी दोनों तालीम हासिल करनी चाहिए। तभी वह अपने परिवार, धर्म और
देश के विकास में अपना सहयोग कर सकता है। मौलाना शेर मोहम्मद ने कलाम
सुनाकर हुसैन की शहादत याद दिलाई।
हजरत पीरे तारिकत आजम मिया साहब, मौलाना
मुस्कीम कादरी, मौलाना अकमल, मौलाना राशिद, मौलाना मुबीन कादरी, सूफी समर
हुसैन आदि ने भी कलाम पेश किए। कांफ्रेंस में अध्यक्ष दिलशाद कादरी,
कोषाध्यक्ष सुभानी, इकराम हुसैन, मोहम्मद नसीम, मो. शहवाज, मो. मुजफ्फर,
मो. जैनुल कादरी, महफूज अली, हसीब, जीलानी, मौलाना कासिम आदि ने शिरकत की।