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इंजेक्शन के दर्द से छुटकारा पाएंगे टीबी के मरीज

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कन्नौज। टीबी के मरीजों को अब इंजेक्शन का दर्द नहीं सहना पड़ेगा। केंद्र सरकार ने टीबी के परंपरागत इलाज को बंद कर दिया है। अब केवल दवाएं दी जाएंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर केंद्र सरकार ने वर्ष 2025 तक भारत को टीबी मुक्त करने का बीड़ा उठाया है।
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जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. जेजे राम ने बताया कि टीबी आनुवंशिक रोग नहीं है। यह संक्रामक रोग है। पूरा इलाज कराकर छुटकारा पाया जा सकता है। टीबी के मरीजों को हर माह 25 इंजेक्शन लगाए जाते थे। मरीज को यह उपचार छह से नौ माह तक लेना होता था। मस्कुलर इंजेक्शन पीड़ा दायक होता था। खासकर बच्चों के मामले में ज्यादा दिक्कतें थीं। अब केंद्र सरकार ने इंजेक्शन फ्री उपचार करने का बीड़ा उठाया है।
राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत टीबी के इंजेक्शन फ्री उपचार की परिकल्पना की गई है। नया उपचार सफलता पूर्वक काम करेगा। जिला कार्यक्रम समन्वयक रंजीत सिंह ने बताया कि जिले में लगभग 3512 टीबी के मरीजों का सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में इलाज चल रहा है। टीबी से ग्रसित सामान्य और एमडीआर श्रेणी के मरीजों को पांच तरह के इंजेक्शन दिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि सही समय पर टीबी की पहचान होने और नियमित इलाज से यह बीमारी ठीक हो जाती है। ठीक से इलाज न होने और इलाज बीच में छोड़ने से यह जानलेवा हो सकती है।
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टीबी के मरीजों को हर महीने 500 रुपये
जिला कार्यक्रम समन्वयक रंजीत सिंह ने बताया कि इलाज उचित पोषण के अभाव में बहुत कारगर नहीं रहता है। इसी से सरकार सभी टीबी मरीजों को निक्षय पोषण योजना के तहत इलाज के दौरान 500 रुपये प्रतिमाह इनके खाते में देती है। इससे कि मरीज दवाई के साथ-साथ पौष्टिक आहार भी ले सकें। जिले में जनवरी 2019 से दिसंबर 2019 तक 1813 टीबी मरीजों को निक्षय पोषण योजना के तहत 500 रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं।
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