स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण किसी भी व्यक्ति की जान जोखिम में पड़ सकती है। प्रशिक्षण लेने के बाद भी विभागीय अफसर संक्रमित सुइयों को खुले में फेंक रहे हैं। जो किसी को भी बीमारी की चपेट में ले सकती हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रत्येक वर्ष इस्तेमाल की गई सिरिंज के निस्तारण से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रतिवर्ष हजारों रुपये इस प्रशिक्षण में सरकार खर्च करती है। प्रशिक्षण पाने के बाद इस नसीहत को स्वास्थ्य विभाग अमल नहीं करता है। इसका उदाहरण मंगलवार को विनोद दीक्षित चिकित्सालय परिसर में देखने को मिला।
अस्पताल परिसर में दर्जनों इस्तेमाल की गई सिरिंज पड़ी मिलीं। स्वास्थ्य महकमा भी इन सिरिंज को देखता तो है, लेकिन उन्हें उठवाने की जहमत नहीं करता। यही नहीं प्रत्येक अस्पताल में सिरिंज इस्तेमाल करने के बाद उसकी निडिल काटने के लिए कटर भी दिए गए हैं। लेकिन एक भी सिरिंज की निडिल नहीं काटी गयी थी।
इस तरह की लापरवाही स्वास्थ्य विभाग की ओर से बरती जा रही है। मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. पीएन बाजपेई का कहना है कि सभी अस्पतालों में सिरिंज निस्तारण के लिए कटर के अलावा लाल-पीले व नीले रंग के डिब्बे भी रखवाए गए हैं।
इसमें इस्तेमाल की गई सुई व सिरिंज के अलावा अन्य कचरे को डालने का निर्देश है। यदि खुले में सिरिंज को फेंका गया है तो अस्पताल के प्रभारी जिम्मेदार है। इसकी छानबीन कराई जाएगी। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।