शहर में हुए दंगे में नामजद साथी वकील की रिहाई की मांग को लेकर तहसील के वकीलों का धरना प्रदर्शन छठवें दिन भी जारी रहा। मंगलवार को भी तहसील कार्यालय बंद रहे। वकीलों ने एसडीएम कोर्ट के बाहर धरना दिया। इस दौरान एसडीएम उदयवीर ने वकीलों के समक्ष वार्ता का प्रस्ताव भेजा। दोपहर 12 बजे तहसील सभागार में दोनों पक्षों की बैठक हुई। यहां एसडीएम, सीओ, तहसीलदार ने वकीलों को समझाने का प्रयास किया। लेकिन वकील नहीं माने। उन्होंने वीर सिंह भदौरिया पर लगाई गई 302 व 307 की धाराएं हटाने की मांग की। इसके बाद आंदोलन खत्म किया जाएगा।
पुलिस क्षेत्राधिकारी सुरेंद्र सिंह ने कहा कि वे कुछ देर बाद मोबाइल पर एसपी से वार्ता करेंगे। वकीलों की मांग उच्चाधिकारियों के समक्ष रखी जाएगी। जितनी भी राहत मिल सकती है, दी जाएगी। लेकिन पहले वकील अपना आंदोलन खत्म करें। सीओ के आश्वासन पर वकील राजी नहीं हुए। वकीलों का कहना था कि जिला प्रशासन पहले इस बात की घोषणा करे कि इन दोनों धाराओं को वीर सिंह पर से हटा लिया जाएगा। करीब डेढ़ घंटे तक चली वार्ता के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकल पाया।
इस पर वकील दोबारा धरने पर बैठ गए। उधर तहसील में अपनी समस्याओं को लेकर आने वाले सैकड़ों फरियादी मायूस होकर वापस लौट गए। वकीलों के समर्थन में तहसील के स्टांप वेंडरों व बैनामा लेखकों ने भी कामकाज बंद रखा। आय, जाति, मूल निवास प्रमाणपत्र के लिए आने वाले छात्र भी भटकते रहे। धरना व वार्ता के दौरान प्रमुख रूप से लायर्स बार के अध्यक्ष हरीशंकर राजपूत, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपू यादव, पूर्व अध्यक्ष सुधीर यादव, संजय शुक्ला, कमलेश पाल, राजेश श्रीवास्तव, नीरज त्रिपाठी, वृजेश शुक्ला, कलक्टर सिंह यादव, अनिल पाल आदि वकील मौजूद रहे।