कन्नौज। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत निर्माणाधीन रेलवे स्टेशन के भवन गिरने के मामले में अब आईआईटी कानपुर तकनीकी जांच करेगा। रेलवे के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक यह गोपनीय जांच होगी, जिसमें भवन निर्माण के मानकों, निर्माण सामग्री सहित करीब 11 बिंदुओं पर आख्या तैयार कर रेल मंंत्रालय को भेजी जाएगी। हालांकि हादसे की जांच रेलवे की उच्च स्तरीय समिति कर रही है। दोनों रिपोर्टों के आधार पर ही कार्यदायी संस्था पर कार्रवाई तय होगी। अमृत भारत योजना प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल है, इसलिए रेलवे इसकी जांच में कोई भी कोताही नहीं बरतना चाहता है।
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत रेलवे स्टेशन पर निर्माणाधीन रेलवे स्टेशन का लिंटर 11 जनवरी को गिर गया था, जिसमें 24 मजदूर घायल हो गए थे। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के निर्देश पर पूर्वोत्तर रेलवे मुख्यालय गोरखपुर ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, जो हादसे की बिंदुवार जांच कर रही है। टीम ने स्टेशन अधीक्षक व आरपीएफ थाना प्रभारी समेत हादसे के समय स्टेशन पर मौजूद वेंडरों व दुकानदारों को गोरखपुर तलब किया था और उनके अलग-अलग बयान दर्ज किए थे। अब सवाल यह उठ रहा था कि शटरिंग में लोहे के गर्डर की जगह बांस-बल्ली का प्रयोग क्याें किया गया था और निर्माण सामग्री का मानक क्या था। काम करने वाले श्रमिकों को सुरक्षा उपकरण क्यों नहीं दिए गए थे और परिसर की बेरीकेडिंग भी नहीं कराई गई थी, जबकि लिंटर डालने का काम पिछले तीन दिन से अनवरत रूप से चल रहा था। रेलवे के एक सूत्र ने बताया कि उच्च स्तरीय समिति हादसे के कारणों की जांच कर रही है, जबकि तकनीकी जांच आईआईटी कानपुर की टीम करेगी। इसमें भवन निर्माण के सभी तकनीकी पक्षों और निर्माण सामग्री के घटकों सहित तकनीकी व वैज्ञानिक पहलुओं की जांच होगी। यह टीम भी पूरी तरह से गोपनीय जांच करेगी और उसकी रिपोर्ट रेलवे मंत्रालय को भेजी जाएगी। पीएम गति शक्ति के अधिशासी अभियंता विपुल माथुर का कहना है कि जीआरपी की टीम एफआईआर की विवेचना कर रही है। सभी रिपोर्ट कंपाइल कर उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।
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मुख्य संरक्षा आयुक्त कर चुके निरीक्षण
रेलवे स्टेशन पर हुए हादसे की जांच मुख्य संरक्षा आयुक्त पवन कुमार श्रीवास्तव व आरपीएफ के आईजी तारिक अहमद भी कर चुके हैं। दोनों अधिकारियों ने भी अपनी रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें शटरिंग ठेकेदार की लापरवाही को ही बताया गया है। इसी कारण जीआरपी ने ठेकेदार बरेली के दीदार पट्टी निवासी हनीफ को मुख्य आरोपी बनाया है। कार्यदायी संस्था बलिया की आशुतोष इंटरप्राइजेज फर्म के मालिक रामविलास राय और सिविल इंजीनियर सूरज प्रकाश मिश्रा भी आरोपी हैं। अभी तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
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13.50 करोड़ का दिया गया था बजट
कन्नौज रेलवे स्टेशन का कायाकल्प करने के लिए रेलवे ने 13.50 करोड़ का बजट स्वीकृत किया था। इसको एयर पोर्ट की तरह विकसित करने की योजना था। पूर्वोत्तर रेलवे इज्जतनगर मंडल की मंडल रेल प्रबंधक वीणा सिन्हा ने बताया कि यह प्रधानमंत्री की अति महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। रेलवे मंत्रालय के निर्देश पर हादसे की सभी प्रकार की तकनीकी और वैज्ञानिक जांच चल रही है। सीसीटीवी फुटेज का भी अवलोकन किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही कार्रवाई के बारे में निर्णय लिया जाएगा।