अलियापुर गांव के लोग भी लोगों के मरने व बीमार होने का कारण जहरीली शराब
पीना बता रहे हैं। जगदीश के भाई हंसराम ने बताया कि गांव के कुछ युवकों के
साथ जगदीश ने भी फ्री में बांटी गई शराब पी थी। शराब जहरीली होने से कुछ
घंटों बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी। इस पर वह घर आकर सो गया।
सुबह जब काफी
देर तक वह उठा नहीं तो परिजनों को चिंता हुई।उसे
जगाया तो उसकी आंख नहीं खुल रही थी। काफी कोशिश करने के बावजूद वह कुछ बोल
नहीं पाया। इशारे से कुछ दिखाई पड़ने की बात बताई। उसे निजी अस्पताल लेकर
गए। घर की जमा पूंजी सात हजार रुपये खर्च हो गए पर भाई की जान नहीं बचा
पाया।
हंसराम का कहना है कि उसके भाई की मौत के लिए जहरीली शराब और उसे
बांटने वाले प्रधान पद के प्रत्याशी जिम्मेदार हैं। बताया कि घटना के बाद
अब कोई मदद के लिए आगे नहीं आ रहा है। उसने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच
कराने, बच्चों के भरण पोषण के लिए आर्थिक सहायता दिलाने व शराब बंटवाने
वालों को दंडित कराने की मांग की है।
अलियापुर की जगरानी ने बताया कि
अचानक बीमार पड़ने के बाद पूछने पर उसके बेटे श्रीराम ने चुनाव के चक्कर
में बंटी शराब पीने की बात बताई। तेज सिरदर्द, छटपटाहट व आंखों की रोशनी से
वह परेशान हुआ तो अस्पताल लेकर भागे। रविवार को उसने दम तोड़ दिया। आरोप
लगाया कि जहरीली शराब ने उससे उनका बेटा छीन लिया है।
श्रीराम की पत्नी
नैना ने बताया कि जहरीली शराब ने सब कुछ उजाड़ दिया है। उसके पास खेती नहीं
है। पति खेतों व घरों आदि के निर्माण के दौरान मजदूरी करके जो पैसे लाते
था उसे से घर का चूल्हा जलता था। वृद्ध मां, पत्नी, बेटी मुस्कान, खुशबू व
बेटे अजय समेत पांच सदस्यीय परिवार में एकमात्र कमाने वाले श्रीराम की मौत
से परिवार के समक्ष भूखे मरने की नौबत पैदा हो गई है।