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कैसे बढ़ें विदेशी परिंदे ...नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी करेगी शोध

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पक्षी विहार की झील में कलरव करते प्रवासी व अप्रवासी पक्षी। - फोटो : KANNAUJ
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कन्नौज। लाख बहोसी पक्षी विहार में लगातार कम हो रही विदेशी और स्वदेशी पक्षियों की संख्या पर केंद्र सरकार के विज्ञान व तकनीक मंत्रालय ने चिंता जताई है। पक्षी विहार की झीलों में पक्षियों की संख्या बढ़ाने को लेकर शोध के मकसद से दिल्ली से तीन दिवसीय दौरे पर बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी का दल आ रहा है। यह दल पक्षियों की घट रही संख्या की बाबत पड़ताल करेगा। इनकी संख्या बढ़ाने पर भी कवायद होगी।
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करीब पांच साल पहले लाख बहोसी पक्षी विहार में हर साल सर्दियों में 50 हजार से एक लाख तक यूरोप, साइबेरिया, लद्दाख, आस्ट्रेलिया, गुजरात और असोम से पक्षियों का आगमन होता था। बढ़ते शोरगुल और प्राकृतिक स्रोतों के पतन से पक्षियों ने यहां आना कम कर दिया। मौजूदा समय में 20 से 50 हजार तक गिनी चुनी प्रजातियों के पक्षी पहुंच रहे हैं।
17 जनवरी को दिल्ली से बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के सदस्य आरएन चतुर्वेदी (सेवानिवृत्त उत्तर प्रदेश वाणिज्य कर विभाग प्रथम श्रेणी जज) के साथ सेवानिवृत्त आईएएस विवेक गुप्ता के साथ विशेषज्ञ आ रहे हैं। यह दल 19 जनवरी तक केंद्र सरकार के विज्ञान व तकनीक मंत्रालय के निर्देश पर पक्षी विहार में शोध करेगा। पक्षियों की घटती तादाद का पता लगाया जाएगा। झीलों में विदेशी और देशी पक्षियों की आवक बढ़ाने को लेकर भी पड़ताल होगी। पक्षी विहार के कर्मचारी करन सिंह ने बताया कि बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी की टीम 16 जनवरी की शाम दिल्ली से आ जाएगी। टीम तीन दिन तक शोध करेगी।
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विश्व के 30 देशों में शोध करती है सोसाइटी
भारत में पक्षियों और वन्य जीवों के संरक्षण और जैव विविधता पर शोध करने वाले सबसे बड़े गैर-सरकारी संगठनों में से बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी शामिल है। इसकी स्थापना 15 सितंबर 1883 में की गई थी। मुख्यालय मुंबई के हार्नबिल हाउस में है। यह जर्नल ऑफ बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी नामक पत्रिका का प्रकाशन भी करती है। केंद्र सरकार के विज्ञान व तकनीक मंत्रालय की ओर से इसे ‘वैज्ञानिक व औद्योगिक अनुसंधान संगठन’ के रूप में भी जाना जाता है। विश्व के 30 देशों में भ्रमण कर सोसायटी के सदस्य शोध करते हैं।
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