कन्नौज। इत्र की तरह कन्नौज के गट्टा व छिबरामऊ के पेड़ा का सफर भी शताब्दी पार कर चुका है। चीनी व सूखे मेवा के मिश्रण से बनने वाले इस गट्टे का अनोखा स्वाद हर किसी को लुभाता है। वहीं छिबरामऊ के पेड़ा का स्वाद जो एक बार चख लेता, भूल नहीं पाता है। लंबे समय से इत्रनगरी के गट्टा व पेड़ा कारोबारियों को व्यापार बढ़ाने के लिए जीआई टैग का इंतजार था। अब एक जिला एक उत्पाद के रूप में पहचान मिलने से कारोबारियों में बेहतर व्यवसाय की उम्मीद जागी है।
इत्रनगरी के सुगंधित कलावती गट्टा कारोबार का सफर 102 वर्ष पुराना हो चुका है। यह गट्टा जो एक बार खाता है, वह इसका स्वाद भूल नहीं पाता, इसकी पहचान बिल्कुल अलग है जिसे कोई भी व्यक्ति सिर्फ देखकर पहचान सकता है। सूखे मेवा, चीनी के मिश्रण का गट्टा देश में कहीं नहीं बनता है। नगर के लाखन तिराहा पर कलावती गट्टा भंडार है। गट्टा कारोबारी सक्षम गुप्ता ने बताया कि उनके परिवार की चार पीढि़यां वर्ष 1923 से लगातार उत्कृष्ट श्रेणी का गट्टा निर्माण कर रही हैं। देश के अलावा विदेशों में भी रहने वाले लोग इसे मंगवा रहे हैं। इनके यहां बना गट्टा 120 से 800 रुपये प्रतिकिलो तक मिलता है।
बाबूराम के पेड़े की मिठास पहचान
छिबरामऊ। योगी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना एक जिला एक व्यंजन में छिबरामऊ के बाबूराम के पेड़े को चुना गया है। सरकार अब नगर की पहचान बाबूराम के पेड़े की महक व स्वाद को देश के अन्य शहरों में पहुंचाएगी। नगर की पीपल वाली गली में बाबूराम गुप्ता ने आजादी से पहले साल 1941 में खरे पेड़ा के नाम से दुकान खोली थी। खोए की सोंधी खुशबू के साथ इलायची की महक पेड़ा के स्वाद को और भी बढ़ा देती है। बाबूराम गुप्ता के पुत्र स्वतंत्र गुप्ता ने बताया कि दुकान पर पेड़े बनाकर उनके पिता फतेहगढ़ में बेंचने जाते थे, जहां अंग्रेज अफसर उनके पेड़े को हाथों हाथ लेते थे। उस दौरान इसकी कीमत पांच रुपये प्रति किलो थी। वर्तमान में तीसरी पीढ़ी के कृष्णबिहारी गुप्ता व रामनिवास उर्फ जॉनू इस व्यवसाय से जुड़े हैं। पांच रुपये प्रति किलो से शुरू हुई बाबूराम के पेड़ा अब 800 रुपये प्रति किलो बिक रहे हैं।
तोहफे के लिए बाबूराम का पेड़ा पहली पसंद
स्वतंत्र गुप्ता ने बताया कि कांग्रेस शासन काल में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बाबूराम के पेड़े को मंगवाकर इसके स्वाद की तारीफ की थी। इसके अलावा यहां के जनप्रतिनिधि योगी आदित्यनाथ, पूर्व सीएम अखिलेश यादव से लेकर कई राजनेताओं व अफसरों को भेंट करने के लिए लोग बाबूराम का पेड़ा लेकर जाते हैं।
विश्व स्तर पर मिलेगी पहचान
एक जनपद एक व्यंजन प्रस्ताव पास होने के बाद जनपद की चयनित मिठाई की गुणवत्ता में सुधार, बेहतर पैकेजिंग, आकर्षक ब्रांडिग पर काम किया जाएगा। साथ ही हलवाइयों, कारीगरों और खाद्य उद्यमियों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। मेलों, पर्वों और प्रदर्शनियों के जरिये बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। उद्यमियों को 25 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। इससे बाजार की प्रतिस्पर्धा में मदद मिलेगी।