संवाद न्यूज एजेंसी
कन्नौज। गुजरात वन विभाग और पुलिस टीम ने बुधवार रात स्थानीय वन विभाग टीम के सहयोग से पैंगोलिन(सल्लू सांप) तस्कर को दबोच लिया। वह गिरफ्तारी से बचने के लिए गुजरात से भागकर फर्रुखाबाद अपने पैतृक गांव जा रहा था। यहां सदर कोतवाली क्षेत्र के जलालपुर पनवारा के पास उसे टीम ने दबोचा। पूछताछ के बाद वन विभाग टीम तस्कर को कड़ी सुरक्षा के बीच अगली छापेमारी के लिए राजस्थान लेकर रवाना हुई है।
वन विभाग के अधिकारियों ने दुर्लभ जीवों की तस्करी करने वाले तस्करों की गिरफ्तारी के लिए उत्तराखंड, गुजरात, राजस्थान से लेकर उत्तर प्रदेश के कई शहरों तक छापेमारी चल रही है। 17 सितंबर को उत्तराखंड वन विभाग और पुलिस टीम ने बहेड़ी हल्दानी निवासी नदीम और बिलासपुर हल्दानी निवासी कासिम को गिरफ्तार किया था। उसके पास से दो पैंगोलिन जिंदा और एक का शव कार से मिला था। पूछताछ के बाद वन विभाग टीम को तस्करों के बड़े नेटवर्क का पता चला। यह भी पता चला कि यह कई राज्यों तक फैला है। पकड़े गए तस्करों से पूछताछ के बाद 20 सितंबर को गुजरात के भरूच वन विभाग टीम ने 22 जकरिया पार्क काप्रोदा अंकलेश्वर भरूच में रहने वाले तस्कर मोहम्मद मिनहाज पुत्र मोहम्मद शफी के घर छापा मारा। यहां वन विभाग टीम को पैंगोलिन की खाल और हिरन के अवशेष मिले। मोहम्मद मिनहाज नहीं मिला। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह उत्तर प्रदेश भाग आया था। गिरफ्तारी के लिए एमके गोहिल सीओ वन प्रभाग अंकलेश्वर रेंज भरूच और गुजरात पुलिस के सिपाही एपी पटेल और एमएम सिंह ने उत्तर प्रदेश का रुख किया। सर्विलांस सेल भरूच की मदद से डीएफओ कन्नौज जवाहर लाल गुप्ता और रेंजर अरविंद मिश्रा के साथ बुधवार रात करीब 10 बजे सदर कोतवाली के जलालपुर पनवारा में रहने वाले उसके एक दोस्त के यहां से मोहम्मद मिनहाज को दबोच लिया गया। मूलरूप से मोहम्मद मिनहाज फर्रुखाबाद का रहने वाला है। इससे वह फर्रुखाबाद जा रहा था। विनोद दीक्षित चिकित्सालय में कोरोना और मेडिकल परीक्षण कराने के लिए वन विभाग की टीम ने उसे सीजेएम के सामने पेश किया। इसके बाद उसके अन्य साथियों की गिरफ्तारी के लिए कड़ी सुरक्षा के बीच राजस्थान की ओर लेकर टीम रवाना हो गई।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 50 लाख रुपये तक में बिकती पैंगोलिन
कन्नौज। दुर्लभ पैंगोलिन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तस्करी होती है। यह करीब 50 लाख रुपये तक बिकती है। जिला वन अधिकारी जवाहर लाल गुप्ता ने बताया कि हांगकांग, सिंगापुर, मलेशिया और चीन में पैंगोलिन से उत्तेजक दवाएं बनाई जाती हैं। यूनाइटेड स्टेटस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलमेंट के सर्वे के अनुसार पैंगोलिन विलुप्त होने की कगार पर है। मौजूदा समय पूरे विश्व में करीब 27 लाख ही पैंगोलिन बची हैं। भारत, श्रीलंका, नेपाल और भूटान में यह दुर्लभ पैंगोलिन पाई जाती है।
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10 से 16 किलो तक का होता वजन
कन्नौज। दो पैरों वाले पैंगोलिन का सामान्य वजन 10 से करीब 16 किलो तक होता है। इसकी लबाई करीब चार फीट तक होती है। जिला वन अधिकारी ने बताया कि पैंगोलिन चींटीखोर जंतु है। यह अपनी चिपचिपी जीभ से चींटियों का शिकार करता है। इस गहरा भूरा रंग होता है। पैंगोलिन की खाल से लेकर मांस की तस्करी होती है।