धान खरीद केंद्र पर पसरा सन्नाटा
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कन्नौज। मानकों के फेर में उलझी धान खरीद अधिकारियों की फटकार के बाद भी गति नहीं पकड़ पा रही है। खरीद केंद्र खुले करीब दो माह का समय बीत चुका है। मंडी समिति पर बने विपणन शाखा केंद्र पर 10 हजार क्विंटल खरीद के लक्ष्य के सापेक्ष अभी तक केवल 4077 क्विंटल ही खरीद हो सकी है जबकि खरीद करने की समय सीमा 28 फरवरी निर्धारित की गई है।
जिले में धान खरीद के लिए एफसीआई, यूपी एग्रो, विपणन साखा, पीसीएफ, एनसीसी संघ आदि के केंद्र खोले गए हैं। सभी केंद्रों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। धान खरीद में गुणवत्ता को लेकर जो मानक तय किए गए हैं, वे खरीद में बड़ी समस्या बने हैं। केंद्र प्रभारी किसानों की धान की खरीद नहीं कर पा रहे हैं। जबकि जिलाधिकारी ने बीते दिनों धान खरीद केंद्र के संबंध में ली अधिकारियों की बैठक में कई निर्देश जारी किए थेे जिसमें कहा गया था कि केंद्र पर किसानों की धान की खरीद हर हाल में की जाए। यदि केंद्र पर धान की कमी हो तो तत्काल धन मुहैया कराया जाए। यदि धान की खरीद मंडी समिति में आढ़ती कर रह हैं तो उसकी जानकारी मंडी सचिव प्रतिदिन शाम आठ बजे दें, इससे किसानों को हुई क्षति की जानकारी मिल सकेें । यही नहीं यदि किसानों की धान को फाइन धान बताकर खरीद की जा रही है तो इसके बारे में भी बताया जाए। सचिव इसकी खुद जांच करें। केंद्रों पर धान की खरीद प्रतिदिन कितनी हुई है, यह जानकारी भी दी जाए। धान जिले के बाहर किसी दशा में बिक्री के लिए न जा सके। मंगलवार को मंडी समिति विपणन शाखा केंद्र पर सन्नाटा पसरा रहा। इसकी मुख्य वजह मंगलवार को मंडी समिति पर खरीद बंद रहती है। यही वजह से किसान मंगलवार को मंडी समिति केंद्र पर धान नहीं लेकर पहुंचे। इससे केंद्र पर लगे कर्मचारी पूरे दिन बैठ कर बतियाते रहे।
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खराब धान में निकलता कम चावल
कन्नौज। मंडी समिति केंद्र के विपणन निरीक्षक प्रेम कुमार ने बताया कि धान खरीद में मानकों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यदि धान में कमी मिलती है तो उसे साफ कराया जाता है। नम धान होने पर किसान से धान सुखा कर लाने को कहा जाता है। मानक पर खरी धान न उतरने पर उसे रिजेक्ट किया जाता है. धान की क्वालिटी ठीक न होने पर चावल की निकासी कम होती है। इससे सरकार को नुकसान हो जाता है। एक क्विंटल धान में करीब 65 किलो चावल निकलना चाहिए । यदि धान खराब हुई तो चावल केवल 50 किलों निकलता है। इससे केंद्र के प्रभारी पर कार्रवाई हो सकती है। इसी को देखते हुए केंद्र प्रभारी खराब धान लेने से मना कर देते है जिस पर किसान केंद्र प्रभारी की शिकायत करता है।
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