उड़त गुलाल लाल भए बदरा गीत की यह पंक्तियां उस समय
चरितार्थ हो गईं जब जय मां दुर्गा मंदिर मोहल्ला छपट्टी से निकली गणेश जी
और मां दुर्गा प्रतिमा की विसर्जन यात्रा में भक्तों ने अबीर-गुलाल उड़ाकर
एक दूसरे को रंगों से सराबोर कर दिया।
समिति की ओर से शारदीय नवरात्र
के प्रथम दिन मंदिर में गणेश जी और मां दुर्गा प्रतिमा की स्थापना की गई
थी। इसके बाद नवमी तक मां दुर्गा के स्वरूपों का सजीव प्रस्तुतीकरण किया
गया, जिसे देखने के लिए मंदिर परिसर की जगह भी कम पड़ गई। शुक्रवार को हुए
भंडारा में हजारों श्रद्धालुओं ने मां का प्रसाद छका।
शनिवार को समिति के
राजीव उर्फ रिंकू अरोड़ा, अंकित गुप्ता, मनीष वर्मा, दीपक, रबी, जानू,
गौरव, विवेक, संदीप, राजन, शिवम, डॉ. एनसी सक्सेना आदि ने गणेशजी और फिर
मां अंबे की आरती की। इसके बाद विसर्जन यात्रा शुरू हुई। ट्रैक्टर पर बनाए
गए रथ पर गणेश जी सहित मां दुर्गा प्रतिमा की स्थापना की गई।
डीजे पर
बज रहे भक्ति गीतों नैनन में श्याम समाए गयो, मोहे प्रेम का रोग लगाए गयो
और मेरी भी सुनो हे मात भवानी पर बच्चों और युवाओं के साथ महिलाएं भी झूम
कर नाची। नगर में माली वाली गली, नगरपालिका रोड, बाजार और फिर पीपल वाली
गली से फर्रुखाबाद रोड होती हुई यात्रा काली नदी पर पहुंची।
यहां
विधि-विधान के साथ दोनों प्रतिमाओं का विसर्जन कर दिया गया। विसर्जन यात्रा
में भावना अरोड़ा, सरिता, रामदुलारी, सरोजनी, राजरानी, मीरा पाल,
स्नेहलता, मंजू, सिया दुलारी, सावित्री, सोनल और बीना सहित भारी संख्या में
युवक भी मौजूद थे।
उधर, हाई कोर्ट ने नदियों में प्रतिमाओं के विसर्जन
पर पूरी तरह रोक लगा रखी है। गणेश महोत्सव के दौरान वाराणसी में बवाल भी
हुआ था। नगर में गत वर्ष पुलिस और प्रशासन ने लोगों की आम सहमति पर सौरिख
रोड पर स्थित ककरारी तालाब को प्रतिमा विसर्जन के लिए चिह्नित किया था।
गत
वर्ष और इस वर्ष गणेश महोत्सव के बाद अभी दो दिन पहले नगर के चार स्थानों
पर स्थापित की गई दुर्गा प्रतिमाओं का भी विसर्जन पुलिस की देखरेख में
ककरारी तालाब में किया गया था, पर शनिवार को छपट्टी में स्थापित की गई माता
दुर्गा की प्रतिमा प्रशासन ने ककरारी तालाब की बजाय जहानगंज रोड पर स्थित
काली नदी में विसर्जित करवाई।