Gita is the Medium of art of living life
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छिबरामऊ (कन्नौज)। अखिल विश्व गीता ज्ञान महोत्सव पर नगर के शक्ति पीठ गमा देवी मंदिर में गीता पर परिचर्चा की गई। लोगों ने गीता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उसकी महिमा का वर्णन किया।
शक्ति पीठ के पुजारी पं. बनारसी दास शास्त्री ने कहा कि भगवान के सभी प्रिय हैं। समाज के सभी वर्गों को गीता पढ़ने का अधिकार है। पं. ब्रजमोहन शास्त्री ने कहा कि मनुष्य को निष्काम भाव से कर्म करना चाहिए एवं परमात्मा के प्रति खुद को समर्पित रखना चाहिए। पं. हरिओम त्रिपाठी ने कहा कि गीता स्वयं भगवान के मुख से निकली वाणी है। गीतामृत का पान करने वाला मनुष्य मोक्ष को प्राप्त करता है।
संतोष पांडेय ने कहा कि गीता हमें जीवन जीने की कला सिखाती है। वेद, पुराण, उपनिषद का सारतत्व गीता है। सुंदरम पाठक ने कहा कि मनुष्य को निष्काम भाव से रहना चाहिए। मोह माया से दूर होकर जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करना चाहिए। कार्यक्रम का समापन आरती के बाद भोग प्रसाद वितरण के साथ हुआ। इस दौरान भरत चतुर्वेदी, लज्जाराम वर्मा, भजनलाल, भारत सिंह वर्मा, कमलेश दुबे, विक्की दुबे, अभिषेक तिवारी, जितेंद्र वर्मा सहित कई लोग मौजूद रहे।