सैकड़ों साल से हो रही मियांगंज की रामलीला गंगा
जमुनी संस्कृति की मिशाल है। इस गांव के लोग मिल-जुलकर त्योहार मनाकर एकता व
भाईचारे का संदेश देते हैं। यहां आयोजित होने वाले धार्मिक आयोजनों में
क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लोग शामिल होते हैं। पुरानी परंपरा आज भी
जारी है।
रामलीला कमेटी में संरक्षक गयादीन कमल, अध्यक्ष सियाराम बाथम
के साथ अब्दुल खालिक, इलियास, मजीद, गुड्डू कुरैशी, इकबाल रायनी समेत कई
मुस्लिम समुदाय के लोग भी जुड़े हैं। पांडाल, मेला स्थल तैयार करने से लेकर
कलाकारों की मंडली लाने व उनके खाने-पीने का इंतजाम करने में दोनों समुदाय
के लोग व्यवस्था करते हैं।
बुजुर्ग बताते हैं कि देश की आजादी के बाद
मियांगंज में उर्स, कव्वाली, रामलीला व रासलीला के आयोजनों से धार्मिक
एकजुटता व सौहार्द कायम किया जाता है। हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग
एक-दूसरे के धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन में कंधे से कंधा मिलाते हैं।
वकील रामगोपाल बताते हैं कि मियांगंज में कई ऋषि-मुनियों ने जन्म लिया है।
यहां के स्वामी भजनानंद, विवेकानंद, नारदानंद की प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली
है। उस्मान रायनी बताते हैं कि यह ऐतिहासिक गांव है, जहां हमेशा से
भाईचारा कायम रहा है। एक-दूसरे के घरों पर भी लोग जाकर बधाई देते हैं व
पकवानों का लुत्फ उठाते हैं।